Gungun Sharma/Alive News
Faridabad : सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एनसीआर के आवारा कुत्तों से जुड़े अपने हालिया आदेश में संशोधन किया था। जिसमें कहा गया कि आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के बाद उनके मूल स्थान पर वापस छोड़ दिया जाएगा। सिवाय आक्रामक और रेबीज वाले कुत्तों के साथ ही पालतू कुत्तों का भी रजिस्ट्रेशन कराया जाये। इन आदेशों के बावजूद भी नगर निगम अधिकारियों ने कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और रजिस्ट्रेशन का काम धीमी गति से किया जा रहा है। जिस कारण शहर में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन नगर निगम इस पर कोई ठोस कदम उठाता दिखाई नहीं दे रहा। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार फरीदाबाद में हर साल करीब पन्द्रह हजार लोग कुत्तों के हमले का शिकार हो रहे हैं, जिनमें बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित हैं।
नगर निगम के एमओएच विभाग के अधिकारी नितेश प्रवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि रजिस्ट्रेशन संबंधित जानकारी क्लर्क दिनेश के पास रहती है, जब संवाददाता ने दिनेश से जानकारी मांगी गई तो उन्होंने बताया कि किसी तकनीकी समस्या के कारण रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर पालतू कुत्तों से संबंधित आवेदन नहीं हो पा रहे है।
इसको लेकर फिर संवाददाता ने नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी (एमएचओ) नितेश प्रवाल से फोन से जानकारी मांगी गई तो उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नही दिया और फोन काट दिया।
शहर में जगह – जगह आवारा कुत्ते खुले आम घूम रहे है। आवारा कुत्तों के आतंक से आमजन दहशत में हैं। आए दिन कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी (एमएचओ) नितेश प्रवाल सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवेहलना करते दिख रहे हैं। वह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को लेकर गंभीर दिखाई नहीं दे रहे है। अब लोगों राम भरोसे ही हैं। क्योंकि नगर निगम अधिकारी तो कुछ करने वाले नहीं है।
नगर निगम केवल कागजों पर कार्रवाई करता दिखा रहा है, जबकि सड़कों पर आवारा कुत्तों का आतंक जस का तस बना हुआ है। बच्चों और बुजुर्गों पर हमले की घटनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग चुप्पी साधे है। हर रोज निजी और सरकारी अस्पताल में कुत्तों के काटने के मरीज पहुंच रहे हैं। इतना ही नही कई तो कुत्ते के काटने से अपनी जान भी गवा दे रहे है।
हर साल सरकारी अस्पताल में पहुंच रहे है करीब 14 हजार कुत्तों के काटने के केस
-पिछले साल 2024 में कुत्तों के काटने के 14122 केस सामने आए थे।
-इस साल कुत्ते के काटने के एक जनवरी से 28 अगस्त 2025 तक 9008 केस आ चुके है।
(ये आंकड़ा सिर्फ सरकारी बी. के अस्पताल का है)

