Faridabad/Alive News: तुलसी पूजा को लेकर के लोग अपने – अपने क्षेत्र के हिसाब से तुलसी पूजा कर रहे हैं। कई लोग रविवार होने की वजह से कल सोमवार को तुलसी पूजा करेंगे। वहीं, कुछ लोग अपने पारिवारिक परंपरा में तुलसी की पूजन को देखते हुए आ रहे है, इसलिए वह कार्तिक पूर्णिमा के दिन तुलसी पूजन करेंगे। हरियाणा जैसे राज्य में तुलसी पूजन आज यानी रविवार को किया गया। यहां के लोगों की मान्यता के अनुसार देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी पूजा की जाती है। दिल्ली एनसीआर में विभिन्न राज्यों के लोग निवास करते है और वह लोग अपनी मान्यता के अनुसार अपने – अपने त्यौहार को मनाते है।
उत्तर प्रदेश के इटावा क्षेत्र के पंडित कल्लू बाजपेई ने बताया कि विष्णु देव चार माह की निंद्रा में रहते है और आज देवउठनी एकादशी के दिन ही जागते है। कुछ जगह देवउठनी एकादशी के दिन ही तुलसी पूजा की जाती है। उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और बुंदेलखंड में आज तुलसी पूजा की गई है, वही पश्चिमी इलाको में कार्तिक पूर्णिमा के दिन तुलसी पूजा की जाएगी। तुलसी माता भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं। देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह का आयोजन करने से घर में सुख-शांति आती है और सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं। तुलसी पूजा से व्यक्ति को भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसलिए तुलसी पूजा की जाती है।

हरियाणा फरीदाबाद के पंडित कृष्णा ने बताया कि देवउठनी एकादशी को भगवान विष्णु योग निंद्रा से जागते हैं और इसी दिन से शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। देवउठनी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक तुलसी पूजन का महत्व रहता है। हरियाणा के कई इलाकों में आज रविवार होने के कारण कुछ लोगों ने शनिवार को ही तुलसी पूजा की थी, जबकि कुछ सोमवार को करेंगे, क्योंकि रविवार को तुलसी को न तो छुआ जाता है और न ही उसके पत्ते तोड़े जाते हैं।

हरियाणा फरीदाबाद के पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि आज देवउठनी एकादशी के दिन देवों को उठाया जाता है, साथ ही आज ही के दिन लोगों ने अपने घरों में तुलसी और शालिग्राम का विवाह कर उनकी पूजा की। तुलसी माता भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन भी कई लोग तुलसी पूजा करते हैं और इस दिन दीप दिवाली भी मनाते हैं। उन्होंने बताया कि हरियाणा में कुछ लोगों ने आज रविवार होने की वजह से यह सोचकर तुलसी पूजा नहीं की क्योंकि रविवार को तुलसी को न ही छुआ जाता है और न ही उसके पत्ते तोड़े जाते है, तो उन लोगों ने शनिवार को ही तुलसी पूजन और देवउठनी एकादशी का व्रत किया। तो

क्या कहना है महिलाओं का
मैं बचपन से ही देखती आ रही हूं कि हमारे उत्तर प्रदेश में कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही तुलसी पूजा की जाती है और उसी दिन शालिग्राम भगवान और तुलसी माता का विवाह भी होता है। उन्हें तरह – तरह के पकवानों का भोग लगाया जाता है, तो मैं तुलसी पूजा बुधवार को ही करुंगी।
– जय देवी, स्थानीय निवासी दिल्ली

मेरे यहां तुलसी पूजा संध्या काल में शुरू हो जाती है। सबसे पहले तुलसी चौरा (मंच) को साफ करके रंगोली सजाई जाती है फिर तुलसी माता को जल अर्पित कर दीप जलाया जाता है। उसके बाद हल्दी, चावल, रोली और फूल चढ़ाए जाते हैं। पूजा के बाद तुलसी माता की परिक्रमा कर आरती की जाती है। मेरे यहां यह मान्यता है कि इस दिन तुलसी पूजन करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
– रूपा शर्मा, स्थानीय निवासी फरीदाबाद

मैं हर साल तुलसी पूजा के दिन नए वस्त्र, श्रृंगार और अलग – अलग तरह के पकवान बनाकर तुलसी माता को पूजा के दौरान अर्पित करती हूं। यह दिन मेरे लिए एक त्योहार जैसा होता है, क्योंकि तुलसी पूजा मेरे परिवार की एक पारंपरिक परंपरा है। तुलसी पूजा करने से मेरे मन को सुकून मिलता है।
प्रेमा, स्थानीय निवासी फरीदाबाद

