Faridabad/Alive News : जिले में कहने काे ताे 234 रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगे हुए हैं, मगर नियमित रुप से मरम्मत व सफाई न हाेने से इसके बेहतर परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं। रेनवाटर हार्वेस्टिंग के तहत बनाए गए टैंक से पानी जमीन में नही जा पा रहा है। टैंक के आसपास कहीं कचरा जमा है ताे कहीं पैड़ – पाैधा की सूखी पतियाें के ढेर से नालियां बंद पड़ी हैं। ऐसे में टैंक में पानी कैसे जाएगा। पिछले वर्षा तक ताे सिस्टम की मरम्मत व सफाई हाेती थी, मगर इस वर्ष मानसून से पहले कहीं काेई काम नहीं हाे पाया है।
नगर निगम के रिकार्ड के अनुसार विन्न चाैक – चाैराहाें, कार्यालयाें तथा पार्काें में 217 रेनवाटर हार्वेस्टिंग लगे हुए हैं। ऐसे ही एनचएआइ की ओर राष्ट्रीय राजमार्ग पर 27 रेनवाटर हार्वेस्टिंग हैं। हैरानी की बात है कि इतना हाेने पर भी नागरिकाें काे जलभराव से जूझना पड़ता है। बल्लमगढ़ और अजराेंदा चाैक पर अक्सर जलभराव हाेता है और लाेंगाें काे जाम से जूझना पड़ता है। नगर निगम के रेनवाटर हार्वेस्टिंग के टैंकाें के आसपास की नालियाें में कचरा ऐसी ही स्थिति सामने आई। नगर निगम मुख्यालय और नर्सरी का हाल खराब ही दिखा।
अन्य कई क्षेत्राें में भी कमियां पाई गई। यही वजह है कि विभिन्न क्षेत्राें में जलभराव की स्थिति सुधर नहीं रही है।
नगर निगम के अधिकारियाें ने रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम पर कभी ध्यान नहीं दिया। देखरेख न हाेने के कारण एनआइटी में अब पता ही नहीं चल रहा कि यहां कभी रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी थे। अधिकारियाें काे इसकी निगरानी करनी चाहिए।
- मुकेश शर्मा, पुर्व वरिष्ट उप महापाैर
पिछले वर्षा में नियमित रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम मरम्मत कराई गई थी। इस बार निगम कर्मियाे ने ही रेनवाटर ही हार्वेस्टिंग की सफाई की है। कहीं काेई कमी रह गई है ताे दुरुस्त कराया जाएगा। हर नागरिक काे शहर की बेहतरी के लिए नगर निगम का सहयाेग करना चाहिए।
- नितिन कादियान, कार्यकारी अभियंता

