October 3, 2026

राहुल गांधी ने लॉन्च किया ‘सत्याग्रह’ प्लेटफॉर्म, बोले- अन्याय के खिलाफ लड़ रहे लोगों की आवाज जोड़ना मकसद

राहुल गांधी ने सत्याग्रह डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया

New Delhi/Alive News: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 3 अक्टूबर को ‘सत्याग्रह’ नाम से एक डिजिटल पहल शुरू की। इसके जरिए देशभर में अपने अधिकारों और अलग-अलग मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे लोगों की कहानियों को एक मंच पर लाने की कोशिश की गई है। लोग इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने संघर्ष की जानकारी साझा कर सकते हैं।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि देशभर में कई लोग अपने हक के लिए लड़ रहे हैं और कई बार उन्हें अकेले संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने छात्रों, किसानों, आदिवासियों, दलितों और महिलाओं सहित अलग-अलग वर्गों के संघर्षों का जिक्र किया। उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर वे किसी अन्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं तो अपनी कहानी ‘सत्याग्रह’ प्लेटफॉर्म पर साझा करें।

इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग मुद्दों से जुड़े संघर्षों को मैप के जरिए दिखाने की व्यवस्था भी की गई है। इसका उद्देश्य अलग-अलग जगहों पर चल रहे आंदोलनों और लोगों की समस्याओं को एक जगह उपलब्ध कराना बताया गया है।

SIR को लेकर चुनाव आयोग पर विपक्ष के सवाल

राहुल गांधी की यह पहल ऐसे समय सामने आई है, जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं।

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने नवंबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। इन आपत्तियों में फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची से जुड़े डेटा तक पहुंच और SIR की प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे शामिल थे।

रिपोर्ट में गोवा के 97 मतदाताओं का मामला भी सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार, इन मतदाताओं के नाम जोड़ने को लेकर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अंतिम मतदाता सूची में नाम शामिल नहीं हो सके। बाद में इस मामले पर चुनाव अधिकारियों की ओर से स्पष्टीकरण दिया गया।

फॉर्म-6 और वोटर डेटा को लेकर भी उठे सवाल

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की जांच के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े फॉर्म-6 में किए गए बदलावों पर भी सवाल उठाए थे। इसके अलावा चुनावी डेटा के केंद्रीकृत प्रबंधन और राज्यों की भूमिका से जुड़े मुद्दों पर भी आपत्तियां दर्ज की गई थीं।

रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल में करीब 16 लाख अपीलों से जुड़े मामले और गोवा के 97 मतदाताओं का मामला भी चुनाव आयोग के भीतर उठाए गए सवालों का हिस्सा था।

इन रिपोर्टों के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR को लेकर अपनी आपत्तियां तेज की हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है।