April 4, 2025

निजी स्कूलों ने फार्म 6 जमा कराया नहीं और न ही टीचर व स्टाफ की सैलरी बढ़ाई…पर बढ़ा दी फीस

Faridabad/Alive News: नए सत्र के शुरू होने के साथ ही अभिभावकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एक तो प्राइवेट स्कूल संचालकों ने 20 से 30 प्रतिशत फीस बढ़ा दी है जबकि स्कूल को केवल 9 फीसदी फीस बढ़ाने की ही अनुमति होती है, वो भी तब जब स्कूलों की ओर से फॉर्म-6 भरा गया हो और स्कूल के स्टाफ व टीचर की तनख्वाह बढ़ाई गई हो। दूसरा उनसे किताब कॉपी वर्दी को मंहगे दामों में खरीदवाया जा रहा है। जिन किताबों का सेट बाहर 4 हजार रुपये में मिल रहा है, वही सेट स्कूल में 9 से 10 हजार रुपये में बेचा जा रहा है।

हरियाणा अभिभावक एकता मंच ने कहा है कि संचालकों ने न केवल ट्यूशन फीस बल्कि एनुअल फीस, ट्रांसपोर्ट फीस समेत कई चार्ज बढ़ा दिए हैं। बिल्डिंग फंड भी लिया जा रहा है। पुराने छात्रों से भी दाखिला शुल्क दिया जा रहा है। मंच ने निजी स्कूलों की इस मनमानी की शिकायत कई बार मुख्यमंत्री शिक्षा मंत्री चेयरमैन एफएफआरसी कम मंडल कमिश्नर व जिला शिक्षा अधिकारी से की है। लेकिन कोई भी उचित कार्रवाई नहीं हुई है।

मंच के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट ओपी शर्मा व प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा ने अभिभावकों से कहा है कि वे जागरूक व एकजुट होकर निजी स्कूलों की प्रत्येक मनमानी का बिना किसी डर के खुलकर विरोध करें।

मंच के लीगल एडवाइजर एडवोकेट बीएस विरदी ने कहा है कि अभिभावकों को यह अधिकार मिला हुआ है कि वह स्कूल प्रबंधन से जमा कराए गए फॉर्म 6 के सभी पेजों की कॉपी मांग सकते हैं जब अभिभावकों ने फॉर्म-6 की मांग की,तो उन्हें यह नहीं दिया गया। फॉर्म-6 फीस संरचना की पारदर्शिता व फीस बढ़ाने की वैधानिकता के लिए आवश्यक होता है,लेकिन स्कूल इसे साझा करने से इनकार कर रहे हैं। मंच का आरोप है कि स्कूल वालों ने फार्म 6 जमा कराया ही नहीं है यदि कराया भी है तो आधा अधूरा कई बातों को छुपा कर। हरियाणा शिक्षा नियमावली का नियम है कि जो स्कूल फॉर्म 6 जमा नहीं करता या आधा अधूरा जमा करता है तो वह फीस बढ़ाने का अधिकारी नहीं होता है।

मंच के महासचिव कैलाश शर्मा ने एक और जानकारी देते हुये कहा है कि स्कूलों में कक्षा एक से पहले केवल दो प्री-प्राइमरी कक्षाएं एलकेजी यूकेजी होनी चाहिए। लेकिन प्रत्येक निजी स्कूल खासकर सीबीएसई के संचालकों ने इस नियम को ताक पर रखकर प्री नर्सरी, नर्सरी, प्रेप, एलकेजी और यूकेजी के नाम पर तीन-चार कक्षाएं बना बना रखी हैं जिनसे वे कक्षा एक से पहले ही फीस के रूप में लाखों रुपये पेरेंट्स से वसूल लेते हैं। स्कूल संचालक नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से 5-6 महीने पहले ही दाखिले शुरू कर देते हैं और एडमिशन फीस समेत अन्य शुल्कों के रूप में 80 हजार से 1 लाख रुपये तक वसूल लेते हैं।

यह रकम एडवांस में लेकर बैंक में जमा कर ब्याज कमाया जाता है, जबकि पढ़ाई कई महीनों बाद शुरू होती है। मंच ने इस मनमानी के खिलाफ पुनः मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शिक्षा निदेशक को शिकायत भेजकर जांच की मांग की है।