March 7, 2026

पूर्वांचल के लोग आज शाम भान्वस्त को देंगे अर्ध्य

Faridabad/Alive News: छठ महापर्व को लेकर पूर्वांचल के लोग अपने-अपने क्षेत्र के हिसाब से छठ पूजा का पर्व मना रहे हैं। जिसको लेकर उन्होंने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। पूर्वांचल में कई जगह लोग पत्थर व ईंटों से मूर्ति तैयार कर छठी मैय्या की पूजा करते हैं वहीं कुछ लोग घाट से आकर कोसी भरते हैं।

अलग – अलग विधि से की जाती है छठी मैय्या की पूजा

छठ व्रती महिला प्रेमा ने जानकारी देते हुए बताया कि उनके यहां सुबह पांच बजे उठकर स्नान करके चूल्हे की पूजा की जाती है उसके बाद उसी चूल्हे पर सूर्य को अर्घ देने के लिए प्रसाद बनाया जाता है, जैसे ठेकुआ जो मुख्य प्रसाद होता है, पूड़ी और खजूर को घी में बनाया जाता है। चूल्हे को जलने के सिर्फ आम की लकड़ी का ही प्रयोग होता है क्योंकि इसे बहुत ही शुभ माना जाता है।

उन्होने आगे बताया कि शाम को करीब तीन या चार बजे वह और उनका परिवार प्रसाद से भरा सूप और दउरा लेकर घाट पर जाते है जहां पहले वह दिया जलती है और फिर सूर्य को संध्या अर्घ देने के लिए जल में उतर कर अपने हाथ में साबुत नारियल और अगरबत्ती लेकर सूर्य डूबने तक खड़ी रहती है। सूर्य डूबने के पश्चात वह घर आकर कोसी भरती है वो उनकी पुरानी परंपरा है।

 वहीं संजू देवी ने बताया कि उनके यहां व्रती महिलाएं नहाए खाए वाले दिन खुद चूल्हा बनती है और उसी चूल्हे पर सूर्य को अर्घ देने के लिए पुआ, ठेकुआ और खाजा बनता है। उन्होंने बताया कि कई जगह लोग चार या पांच प्रसाद के सूप और दउरा तैयार करते है जो लोगों की अपनी श्राद्ध और आर्थिक स्थिति के ऊपर होता है ऐसा कहा जाता है कि जितना बड़ा परिवार उतनी ज्यादा सूप और दउरा । उनके यहां दो सूप और दउरा तैयार किये जाते है जिसमें बाजार में मिलने वाले सभी प्रकार के फल रखे जाते है साथ ही मूली, कच्ची हल्दी, कच्चा अदरक, गागर, साबुत नारियल और शरीफा होता है। कई लोग जो छठ पूजा करने की इच्छा रखते हैं और उनके पास फल खरीदने के पैसे नहीं होते है तो वो सिर्फ पांच प्रकार के फल ही चढ़ाते है।

उन्होंने बताया कि शाम होते ही वह छठ घाट पर जाती है और वहां जाकर दिया जलती है। उसके बाद सूर्य को संध्या अर्घ देने के लिए वह पहले जल में उतरती है और फिर अपनी साड़ी के पल्लू में हल्दी और चावल का लेप लगाती है क्योंकि यह सूर्य देव को अर्पित किया जाता  है। उसके बाद हाथ में साबुत नारियल और अगरबत्ती लेकर सूर्य डूबने तक वहीं खड़ी रहती है। सूर्य अर्घ के बाद वह अपने हाथ में सूप और दउरा लेकर दो बार धूमकर उसे पानी में छुआती है क्योंकि टोकरी में रखा हुआ प्रसाद सूर्य देव को इस तरह से अर्पित किया जाता है।

रोशन नगर ए ब्लॉक के प्रधान अनीश कुमार ने बताया कि आज सोमवार सुबह से ही घाट को रंग – बिरंगी लाइटों, फूल, केले के पत्तों, झालरों और गन्ने से सजाया जा रहा है। व्रती महिलाओं ने घाट पर आकर छठी मैय्या की प्रतिमा को ईंटों और पत्थरों से बनाया है। शाम को संध्या अर्घ के समय रोशन नगर पार्षद लाल मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में घाट पर उपस्थित रहेंगे।