Faridabad/Alive News: जिले के ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात कई इंचार्ज डॉक्टर और स्टाफ डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और कैंसर के मरीजों का डेटा एनसीडी (नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज) पोर्टल पर अपलोड करने में लगातार लापरवाही बरत रहे हैं। इसके चलते राज्य सरकार को इन गंभीर बीमारियों की वास्तविक स्थिति की सही रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है।
डेटा की कमी के कारण इन बीमारियों की रोकथाम और इलाज को लेकर कोई ठोस और प्रभावी योजना तैयार नहीं हो पा रही है। वहीं, विभाग के सीनियर अधिकारी लोगों को अपने-अपने क्षेत्र के नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज कराने के लिए प्रेरित कर जिला सिविल अस्पताल पर मरीजों का दबाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि सीनियर अधिकारियों के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हो रहा है। इस मामले में डिप्टी चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. एके यादव ने कई डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के कार्य प्रदर्शन पर नाराजगी जताते हुए तत्काल सुधार के आदेश जारी किए हैं।
गौरतलब है कि राज्य सरकार डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और कैंसर जैसी नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों को लेकर गंभीर है। इसी उद्देश्य से पहले सभी स्वास्थ्य केंद्र इंचार्ज को एनसीडी पोर्टल पर मरीजों का डेटा नियमित रूप से अपलोड करने के निर्देश दिए गए थे। यह पोर्टल बीमारियों की रोकथाम और क्षेत्रवार स्थिति का आकलन करने के लिए तैयार किया गया है, ताकि जरूरत के अनुसार दवाओं और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
अब आशा वर्कर्स संभालेंगी मोर्चा
डेटा की स्थिति सुधारने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अब नया आदेश जारी किया है। इसके तहत जिले भर में आशा वर्कर्स घर-घर जाकर सर्वे करेंगी। सर्वे के दौरान डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और कैंसर के मरीजों की पहचान कर उनका पूरा विवरण एकत्र किया जाएगा। ऐसे मरीजों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त इलाज के लिए प्रेरित किया जाएगा और पूरा डेटा एनसीडी पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि इस पहल से न सिर्फ सही आंकड़े सामने आएंगे, बल्कि मरीजों को समय पर बेहतर इलाज भी मिल सकेगा।

