March 7, 2026

सरकारी सुस्ती का शिकार बनी एनसीआर की हवा


Faridabad/Alive News: देश की राजधानी दिल्ली सहित एनसीआर के शहरों की हवा खराब होने लगी है। अक्टूबर की शुरुआत होते ही पर्यावरणविद व प्रदूषण की रोकथाम में जुटीं विभिन्न एजेंसियों को इसकी चिंता सताने लगी है। राजधानी का पर्यावरण शुद्ध रहे, इसके लिए जरूरी है कि साथ लगते एनसीआर के प्रमुख शहरों गाजियाबाद, गुरुग्राम व फरीदाबाद में भी प्रदूषण की रोकथाम के लिए सरकारी तंत्र ने आवश्यक प्रभावी कदम उठाए जाएं, पर सरकारी विभागों में स्थिति अकर्मण्यता वाली रहती है। इसका अंदाजा इस से लगाया जा सकता है कि हवा को शुद्ध करने के लिए जो बजट जारी किया गया था। उसका भी सरकारी विभाग सदुपयोग नहीं कर पाए। हाल यह है कि जो राशि एंटी स्माग गन खरीदने, सड़कों की मरम्मत कर धूल कण को नियंत्रण करने के लिए किए जाने वाले उपायों पर खर्च होनी थी, उसमें से बड़ा हिस्सा फरीदाबाद नगर निगम ने एसटीपी पर खर्च कर दिया। स्पष्ट है कि धन का सदुपयोग न होने का परिणाम आम आदमी को जहरीली हवा के रूप में मिल रहा है। फंड का सदुपयोग नहीं कर पाने को लेकर नगर निगम के अधिकारियों के अपने अपने तर्क हैं।

क्या कहना है अतिरिक्त आयुक्त का 

एनसीएपी  के तहत मिले फंड के प्रयोग को लेकर फाइल तैयार की जा रही है। अभी पांच स्माग निगम ने अपने फंड से ली है। जिनको एक अक्टूबर से सड़कों पर चलाया जा रही है। साथ ही, 10 टैंकर गुरुग्राम की अलग अलग सड़कों पर दौड़ रहे है। अब एनसीएपी के तहत जारी किए गए फंड का प्रयोग अन्य संसाधन खरीदने में किया जाएगा। 

-रविंद्र यादव, अतिरिक्त आयुक्त, गुरुग्राम नगर निगम 

एस्टीमेट बनाने से लेकर टेंडर लगाने में समय लग जाता है। इसलिए सरकार की ओर से जारी किया पूरा फंड वित वर्ष आधा बीत जाने के बाद जारी होता है,  इसको 31 मार्च तक खर्च करना है। तब समय कम मिल पाता है। हम सुनिश्चित करना चाहते है कि फंड का सदपयोग हो।

 -नितिन कादियान, एनसीएपी के नोडल अधिकारी, नगर निगम  फरीदाबाद