Delhi/Alive News: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिकी संसद के जॉइंट सेशन में दुनियाभर के देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि हमारी इकोनॉमी लगातार घाटे में जा रही है। इस नुकसान से बचने के लिए हम उन सभी देशों पर टैरिफ लगाएंगे, जो हमारे सामानों पर टैरिफ लगाते हैं।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने करीब एक महीने बाद 2 अप्रैल को भारत समेत 69 देशों पर टैरिफ लगाने की घोषणा की। यह 9 अप्रैल से लागू होने वाला था, लेकिन ट्रम्प ने तब इसे टाल दिया। अमेरिकी प्रेसिडेंट ने कहा कि वे दुनियाभर के देशों को अमेरिका के साथ समझौता करने के लिए 90 दिनों का वक्त दे रहे हैं।
31 जुलाई को समझौते की तारीख खत्म हो गई। इस दिन ट्रम्प ने 100 से ज्यादा देशों पर टैरिफ लगाया। जिन देशों ने अमेरिका के साथ समझौता किया, उन पर 10 से 20% टैरिफ लगा और जिन देशों ने ऐसा नहीं किया, उन पर 25 से 50% का टैरिफ लगा। भारत पर 25% का टैरिफ लगा, क्योंकि उसने ट्रम्प की शर्तें नहीं मानीं।
5 देश जो अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुके
भारत: मांसाहारी गाय का दूध लेने को तैयार नहीं
ट्रम्प ने भारत पर पहले 26% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। 4 महीने बाद इसमें सिर्फ 1% का अंतर आया। अब भारत पर 25% टैरिफ लागू है।
भारत और अमेरिका के अधिकारियों के बीच कई स्तर की बातचीत हुई, लेकिन 31 जुलाई तक कोई समझौता नहीं हो पाया। अमेरिका और भारत के बीच डील न होने पर ट्रम्प ने नाराजगी जताई और कहा कि वे रूस से हथियार और तेल खरीदने की वजह से भारत पर पेनल्टी भी लगाएंगे।
वजह: अमेरिका भारत के एग्री और डेयरी सेक्टर में एंट्री चाहता है और मांसाहारी गाय का दूध बेचना चाहता है, लेकिन भारत इसके लिए तैयार नहीं है।
इसके पीछे किसानों के हित के अलावा धार्मिक वजहें भी हैं। साथ ही भारत अपने छोटे और मंझोले उद्योगों (MSME) को लेकर ज्यादा सावधानी बरत रहा है।
चीन: सरकारी कंपनियों पर सब्सिडी खत्म नहीं करेगा
अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ को लेकर सबसे ज्यादा घमासान मचा। मई में अमेरिका ने चीन पर 145% तक टैरिफ लगाया। इसके बाद चीन ने अमेरिका पर 125% जवाबी टैरिफ लगाया। बाद में इसमें कमी आई। अभी अमेरिका ने चीन पर 30% वहीं, चीन ने अमेरिका पर 10% टैरिफ लगा रखा है।
वजह: अमेरिका, चीन से सिर्फ व्यापार संतुलन नहीं चाहता था। वह चाहता था कि चीन अपनी सरकारी कंपनियों को कम मदद दे। अमेरिका का मानना है कि चीन अपनी सरकारी कंपनियों को बहुत ज्यादा सब्सिडी देता है, जिससे दूसरे देशों की कंपनियां उनका मुकाबला नहीं कर पातीं।
अमेरिका की यह भी मांग है कि चीन टेक्नोलॉजी में विदेशी कंपनियों को ज्यादा मौका दे और और बौद्धिक संपत्ति के कानून (जैसे पेटेंट आदि) में बदलाव करे। चीन इसके लिए तैयार नहीं हुआ।
ब्राजील: सबसे ज्यादा 50% टैरिफ लगा
ट्रम्प ने ब्राजील पर 50% टैरिफ लगा रखा है। हालांकि, कुछ जरूरी चीजों को इस टैरिफ से बाहर रखा गया है। जैसे कि विमान और उनके पार्ट्स, एल्यूमीनियम, उर्वरक, लकड़ी, ऊर्जा उत्पाद और संतरे का जूस। इन पर सिर्फ 10% का पहले से तय टैरिफ ही लागू रहेगा।
वजह: ट्रम्प सबसे ज्यादा नाराज इस बात से हैं कि ब्राजील में पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के खिलाफ सरकार ज्यादती कर रही है। इसके अलावा अमेरिका के साथ ब्राजील का व्यापार घाटा भी बहुत ज्यादा है।
कनाडा: फिलिस्तीन का समर्थन करना महंगा पड़ा
कनाडा पर अमेरिका ने 35% टैरिफ लगा रखा है। पहले यह टैरिफ 25% था। ट्रम्प ने कनाडा पर 10% टैरिफ इसलिए बढ़ा दिया क्योंकि PM मार्क कार्नी ने फिलिस्तीन को अलग देश बनाने का ऐलान किया है।
वजह: ट्रम्प ने कनाडा पर टैरिफ लगाने की दो बड़ी वजहें बताई थीं।
पहला: कनाडा फिलिस्तीन को अलग देश के रूप में समर्थन देता है, जबकि अमेरिका इसके खिलाफ है।
दूसरा: ट्रम्प का मानना है कि कनाडा, अमेरिका में फेंटेनाइल (नशीली दवाओं) के सप्लाई को कंट्रोल करने के लिए जरूरी कदम नहीं उठा रहा है।
दक्षिण अफ्रीका: टैरिफ की वजह चीन, ईरान और रूस से दोस्ती
अमेरिका ने अप्रैल में दक्षिण अफ्रीका पर 30% टैरिफ लगाया था। 4 महीने बाद भी यह बरकरार रहा। दोनों देशों के बीच टैरिफ को लेकर कोई डील नहीं हो पाई।
वजह: ट्रम्प ने दावा किया कि दक्षिण अफ्रीका के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा बहुत ज्यादा है। इसके अलावा ट्रम्प दक्षिण अफ्रीका की रूस, चीन और ईरान के साथ दोस्ती से भी नाराज हैं।

