October 21, 2026

दशहरे पर संदेश: पुतले का नहीं, अपने भीतर के रावण का करें दहन

सिद्धदाता आश्रम में विजयदशमी पर हुआ महायज्ञ, गुरु महाराज ने कहा- अहंकार छोड़कर सत्य और धर्म के मार्ग पर चलें

Faridabad/Alive News: शहरे पर रावण के पुतले का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाया जाता है, लेकिन असली विजय तब होगी, जब इंसान अपने भीतर छिपे अहंकार, क्रोध, लोभ और ईर्ष्या जैसी बुराइयों को खत्म करेगा। इसी संदेश के साथ मंगलवार को सूरजकुंड मार्ग स्थित श्री लक्ष्मीनारायण दिव्यधाम-श्री सिद्धदाता आश्रम में विजयदशमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने महायज्ञ में आहुतियां देकर विश्व कल्याण, सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।

दस सिर दस विकारों के प्रतीक

श्रीमद् जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि विजयदशमी केवल एक ऐतिहासिक घटना का स्मरण नहीं, बल्कि अपनी चेतना को जगाने और अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का अवसर है। रावण के दस सिर मनुष्य के भीतर मौजूद काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या, स्वार्थ, अन्याय, अमानवीयता और क्रूरता जैसे विकारों के प्रतीक हैं। इन बुराइयों पर विजय पाना ही सच्चे अर्थों में रावण दहन है।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म के मार्ग पर चलकर विजय प्राप्त की जा सकती है। मनुष्य को अपने व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने और दूसरों के प्रति संवेदनशील बनने का संकल्प लेना चाहिए।

भजनों पर झूमे श्रद्धालु

कार्यक्रम में भगवान श्री लक्ष्मीनारायण, माता सिद्धदात्री और गुरु महाराज की विशेष पूजा-अर्चना की गई। जयपुर से आए भजन गायक संजय पारीक और लोकेश शर्मा ने भक्ति गीत प्रस्तुत किए, जिन पर श्रद्धालु झूम उठे। इस दौरान आश्रम के प्रकाशन विभाग की ओर से नववर्ष 2027 के कैलेंडर का विमोचन भी किया गया।

देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं ने गुरु महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। कई प्रवासी भारतीय परिवारों ने उनका माल्यार्पण कर और चांदी का मुकुट पहनाकर अभिनंदन किया। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने लंगर प्रसाद ग्रहण किया।