March 7, 2026

ज्ञान, विज्ञान और अध्यात्म से ही मिल सकती है मानसिक शांति : डॉ. अमृता ज्योति

Faridabad/Alive News: अमृता अस्पताल में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय शांति सम्मेलन में श्रीराम सोसाइटी ऑफ रियल एजुकेशन की चेयरपर्सन डॉ. अमृता ज्योति ने कहा कि बिना मानसिक शांति के कोई भी व्यक्ति या समाज अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकता। उन्होंने कहा कि हमारे ऋषि-मुनियों की परंपराओं में मानसिक संतुलन और ध्यान का गहरा ज्ञान है, जिसे आधुनिक विज्ञान से जोड़कर हम एक नई दिशा दे सकते हैं।

यह सम्मेलन श्रीराम सोसाइटी ऑफ रियल एजुकेशन, इंटरनेशनल यूनाइटेड एजुकेशनिस्ट फ्रेटरनिटी ट्रस्ट और हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल कॉन्फ्रेंस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और गुरुवाणी से हुई। देशभर से आए 1500 से अधिक शिक्षकों, प्राचार्यों, अध्यात्म विशेषज्ञों और शिक्षा जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों ने इसमें भाग लिया। डॉ. ज्योति ने कहा कि श्री राम मॉडल स्कूल में शिक्षा के साथ-साथ छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और मूल्य आधारित जीवनशैली पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

जीवा स्कूल के अध्यक्ष ऋषिपाल चौहान ने कहा कि शिक्षा केवल जानकारी देने का माध्यम नहीं, बल्कि संवेदनशील और संतुलित व्यक्तित्व निर्माण का साधन होनी चाहिए। दार्शनिक लेखक राहुल ईश्वर ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक परंपरा में आधुनिक मानसिक संकटों का स्थायी समाधान छिपा है। इंडियन नेशनल ह्यूमन राइट्स के चेयरपर्सन एंथोनी राजू ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य, मानवाधिकारों का मूल हिस्सा है, इसलिए हर संस्थान को इस दिशा में काम करना चाहिए। आर्ट ऑफ लिविंग के राष्ट्रीय निदेशक राजीव नांबियार ने योग, ध्यान और प्राणायाम को मानसिक संतुलन के सबसे प्रभावी उपाय बताया। डॉ. रविराज अत्रे (ओसियन सेंटर्स यूएन ग्लोबल कॉम्पैक्ट इंडिया) ने कहा कि जब विज्ञान और अध्यात्म साथ चलते हैं, तभी व्यक्ति का सम्पूर्ण विकास संभव होता है। कवि दिनेश रघुवंशी ने कहा कि शांति की सबसे सुंदर कविता वही है, जो मन के भीतर गूंजती है। आईयूईएफ के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने कहा कि यह सम्मेलन शिक्षकों और समाज को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व के लिए एकजुट करने का प्रयास है। हरियाणा के मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार राजीव जेटली ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

कार्यक्रम में आर्ट ऑफ लिविंग, ब्रह्माकुमारीज और इस्कॉन के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे, जिन्होंने आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। श्री राम स्कूल के छात्रों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से मानसिक शांति का सुंदर संदेश दिया। “ट्रीमैन” एस.एस. बांगा ने कहा कि प्रकृति से जुड़ाव मानसिक शांति का सबसे सरल मार्ग है। हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सुरेश चंद्र ने कहा कि शिक्षक समाज की सोच को गढ़ते हैं, इसलिए उनका मानसिक रूप से स्वस्थ होना जरूरी है।

एनसीईआरटी की प्रो. सरोज यादव और कौशल विकास मंत्रालय के राजीव पांडे ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य केवल चिकित्सा नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और अध्यात्म के समन्वित प्रयासों से जुड़ा विषय है। एबीवीपी के प्रांत संगठन मंत्री संजय कासवां ने छात्रों से संसाधनों का सावधानीपूर्वक उपयोग करने की अपील की।

कार्यक्रम में स्वागत भाषण हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल कॉन्फ्रेंस के सुरेश चंद्र ने दिया। इस अवसर पर श्रीराम रियल एजुकेशन सोसाइटी के संजय कक्कड़, जगदीप ग्रोवर और केंद्रीय राज्य मंत्री के सलाहकार पंकज मिश्रा सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।