March 7, 2026

जीवन में प्रकाश और जिम्मेदारी का पर्व है मकर संक्रांति : स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य

Faridabad/Alive News: मकर संक्रांति के पावन अवसर पर श्री सिद्धदाता आश्रम की ओर से जरूरतमंदों के लिए सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान आश्रम परिसर में जरूरतमंदों को आमंत्रित कर ससम्मान भोजन कराया गया और दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्री वितरित की गई।
इस अवसर पर आश्रम के अधिपति जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने कहा कि मकर संक्रांति जीवन में प्रकाश, सकारात्मकता और जिम्मेदारी का पर्व है। यह पर्व मनुष्य को आत्मचिंतन, सेवा और दान के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जी के निर्देशानुसार डिलाइट फॉरएवर के पास झुग्गियों में रहने वाले लोगों को आश्रम बुलाया गया। उन्हें भोजन कराने के साथ-साथ दाल, आटा, सरसों का तेल, चीनी, कंबल, जुराब, टोपी, मूंगफली और गजक के पैकेट आशीर्वाद स्वरूप भेंट किए गए।
स्वामीजी ने बताया कि माघ मास में सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है, जिससे सूर्य उत्तरायण होते हैं। उत्तरायण काल को सकारात्मक ऊर्जा और शुभता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध और तर्पण जैसे धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व होता है। इसी सकारात्मक परिवर्तन को मकर संक्रांति कहा गया है।
उन्होंने धार्मिक मान्यताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी दिन पवित्र गंगा नदी का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। साथ ही मान्यता है कि भगवान श्रीहरि विष्णु ने असुरों का संहार कर उनके सिरों को मंदार पर्वत में दबाकर युद्ध की समाप्ति की घोषणा की थी। इसलिए मकर संक्रांति को बुराइयों और नकारात्मकता के अंत का पर्व भी माना जाता है।
स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य ने यह भी कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तरायण काल को प्रकाशमय बताया है और मान्यता के अनुसार इस काल में शरीर त्यागने वाली आत्मा को पुनर्जन्म नहीं मिलता तथा वह मोक्ष को प्राप्त होती है। कार्यक्रम के अंत में आश्रम परिवार की ओर से समाजसेवा और मानवीय मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया गया।