September 3, 2026

रूबियो बोले- भारत-ईरान ट्रेड डील की जानकारी नहीं, तेहरान की मदद करने वालों पर लग सकता है अमेरिकी बैन

मार्को रूबियो और भारत-ईरान ट्रेड डील को लेकर अमेरिकी बयान

International/Alive News: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि उन्हें भारत और ईरान के बीच किसी नई ट्रेड डील की जानकारी नहीं है। उनसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की मुलाकात को लेकर सवाल पूछा गया था। इसी दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि जो देश अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में ईरान की मदद करेंगे, उन पर भी अमेरिका कार्रवाई कर सकता है।

रूबियो का यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की SCO समिट के दौरान हुई मुलाकात के बाद आया है। दोनों नेताओं ने भारत-ईरान संबंधों, व्यापार और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि भारत ईरान के साथ अपने पुराने संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने और नए क्षेत्रों को कारोबार में शामिल करने पर भी जोर दिया गया। मोदी ने BRICS और SCO जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ईरान के साथ सहयोग जारी रखने की बात कही। उन्होंने पजशकियान को 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया।

भारत-ईरान के बीच करीब ₹15,960 करोड़ का कारोबार

भारत और ईरान के बीच 2024-25 में करीब 1.68 अरब डॉलर यानी लगभग ₹15,960 करोड़ का व्यापार हुआ। इसमें भारत ने ईरान को 1.24 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया, जबकि करीब 44 करोड़ डॉलर का आयात किया।

ईरान भारत से बासमती चावल खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच भारत ने ईरान को 7.91 लाख टन बासमती चावल निर्यात किया, जिसकी कीमत करीब ₹5,424 करोड़ थी। इससे पिछले साल इसी अवधि में 6.27 लाख टन बासमती का निर्यात हुआ था, जिसकी कीमत ₹4,862 करोड़ थी।

दोनों देशों के बीच कारोबार सिर्फ चावल तक सीमित नहीं है। भारत ईरान को चाय, चीनी, मैनमेड फाइबर, इलेक्ट्रिकल मशीनरी और दवाओं समेत कई सामान निर्यात करता है।

पश्चिम एशिया की जंग का कारोबार पर असर

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारत और ईरान के बीच व्यापार पर भी पड़ा है। शिपिंग और ईरानी बंदरगाहों से जुड़े काम प्रभावित होने के कारण भारत का कुछ माल रास्ते में अटक गया। 1 मार्च 2026 तक कांडला पोर्ट पर ईरान जाने वाला करीब 35,962 टन माल फंसा था, जिसकी कीमत लगभग ₹305.67 करोड़ बताई गई। वहीं, मुंद्रा पोर्ट पर करीब 5,676 टन माल अटका था, जिसकी कीमत लगभग ₹40.72 करोड़ थी। इसमें चावल, चाय, दवाएं और मेडिकल उपकरण शामिल थे।

भारत के लिए चाबहार पोर्ट क्यों अहम?

ईरान भारत के लिए केवल एक बड़ा बाजार नहीं है। चाबहार पोर्ट भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। इसके जरिए भारत को ईरान और आगे मध्य एशिया तक पहुंचने में मदद मिलती है।

भारत ने 2024 में ईरान के चाबहार पोर्ट के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के संचालन के लिए लंबे समय का समझौता किया था। ऐसे में ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों का असर भारत के कारोबारी और रणनीतिक हितों पर भी पड़ सकता है।

अमेरिका ने ईरान पर बढ़ाए प्रतिबंध

अमेरिका ने ईरान की आर्थिक गतिविधियों से जुड़े कई क्षेत्रों पर प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें डिजिटल एसेट्स, टेक्नोलॉजी, सोना, एविएशन और शिपिंग जैसे क्षेत्र शामिल हैं। अमेरिका का उद्देश्य इन माध्यमों से ईरान की कमाई और अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर दबाव बढ़ाना है।

अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि कोई देश या कंपनी प्रतिबंधों से बचने में ईरान की मदद करती है, तो उस पर भी अमेरिकी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इससे भारत समेत ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों और कंपनियों के लिए जोखिम बढ़ सकता है।

भारत की 4 कंपनियों पर भी कार्रवाई

अमेरिका ने ईरान से तेल और पेट्रोकेमिकल कारोबार के आरोप में भारत की चार कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, इन कंपनियों ने ईरानी पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की खरीद या उन्हें भारत लाने में भूमिका निभाई थी। इन कंपनियों में पोर्टीज पार्टनर्स, सदाशिवा ओवरसीज, पीपी सॉफ्टटेक और प्रकृति इंफ्रा इम्पेक्स इंडिया के नाम शामिल हैं।

फिलहाल भारत के सामने चुनौती यह है कि वह ईरान के साथ अपने मौजूदा व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को कैसे बनाए रखे, जबकि अमेरिका लगातार तेहरान पर प्रतिबंधों का दबाव बढ़ा रहा है।