October 7, 2026

फॉर्म-6 विवाद पर भाजपा का पलटवार, संबित पात्रा बोले- कोई बदलाव नहीं, सिर्फ अटैचमेंट जोड़ा

फॉर्म-6 विवाद पर भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा की प्रेस कॉन्फ्रेंस

New Delhi/Alive News: नई दिल्ली में फॉर्म-6 को लेकर चल रहे विवाद के बीच भाजपा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार किया है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया है, बल्कि इसके साथ सिर्फ एक अतिरिक्त अटैचमेंट जोड़ा गया है।

संबित पात्रा ने दावा किया कि 27 मई को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के लिए सिर्फ फॉर्म-6 पर्याप्त नहीं है। इसके लिए चुनाव आयोग को जरूरी अतिरिक्त दस्तावेज भी उपलब्ध कराने चाहिए। भाजपा का कहना है कि फॉर्म-6 के साथ जो अतिरिक्त दस्तावेज जोड़ा गया है, उस पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई आपत्ति नहीं जताई है।

भाजपा ने राहुल गांधी पर इस मुद्दे को लेकर भ्रम फैलाने और गलत जानकारी देने का आरोप लगाया।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद बढ़ा विवाद

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई हुई थी। सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने SIR के दौरान इस्तेमाल किए जा रहे फॉर्म-6 में किसी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है।

इसके बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि यह साबित हो गया है कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में कथित तौर पर गैरकानूनी और एकतरफा बदलाव किया।

हालांकि, चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के दावे को गलत बताया। आयोग के अनुसार, 24 जून 2025 के बिहार SIR आदेश के दौरान फॉर्म-6 के साथ एक घोषणा-पत्र जोड़ा गया था।

भाजपा ने कहा- SIR पर सभी चुनाव आयुक्तों की सहमति

भाजपा ने SIR को लेकर विपक्ष के उस आरोप को भी खारिज किया कि चुनाव आयोग ने सभी चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना फैसला लिया। पार्टी ने कहा कि SIR को लेकर निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया था।

चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को जारी बयान में भी कहा था कि SIR से संबंधित फैसला सभी चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिया गया था। आयोग ने इस संबंध में एक तस्वीर भी जारी की थी, जिसमें तीनों चुनाव आयुक्तों के साथ होने की बात कही गई थी।

कोर्ट ने कहा- कानून के खिलाफ फैसला हुआ तो रद्द हो सकता है

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। कोर्ट ने कहा कि अगर चुनाव आयोग के फैसले कानून के खिलाफ या बिना आवश्यक सहमति के लिए गए पाए जाते हैं, तो उन्हें रद्द किया जा सकता है।

चुनाव आयोग का कहना है कि बिहार में SIR का आदेश सर्वसम्मत मंजूरी के बाद जारी किया गया था। आयोग ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के अपने फैसले में इस आदेश को बरकरार रखा था।

क्या है फॉर्म-6?

फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में पहली बार नाम जुड़वाने के लिए किया जाता है। SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग ने दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना कई फैसले लिए।

हाल ही में सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट में भी दावा किया गया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना SIR से जुड़े करीब 14 फैसले लिए। हालांकि, इन आरोपों को लेकर संबंधित पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं।