Faridabad/Alive News : फरीदाबाद सेक्टर-21बी स्थित जीवा पब्लिक स्कूल के चेयरमैन एवं शिक्षाविद ऋषिपाल चौहान को कोच्चि (एडापल्ली) स्थित अमृता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ में आयोजित ‘विकसित भारत हेतु शिक्षा ज्ञान सभा’ में वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया, जहां उन्होंने ‘जीवा लर्निंग सिस्टम’ पर विस्तृत और प्रभावशाली प्रस्तुति दी।
गणमान्य अतिथियों ने जीवा लर्निंग सिस्टम की बहुत सराहना की और इसे प्रेरणादायक बताया एवं इसे अपने अपने संस्थानों में अपनाने की बात भी की। उपस्थित सभी शिक्षाविद अतिथियों का मानना था कि ‘जीवा लर्निंग सिस्टम राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ के अनुरूप है।
कार्यक्रम में ऋषिपाल चौहान की उपस्थिति एवं जीवा लर्निंग सिस्टम पर उनके वक्तव्य न केवल जीवा पब्लिक स्कूल के लिए, अपितु समूचे फरीदाबाद शैक्षिक क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। इस अवसर पर शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान एवं नवीन तकनीकों के प्रयासों के लिए उन्हें विशेष सम्मान से अलंकृत किया गया।
चार दिवसीय इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को भारतीय शिक्षा प्रणाली में प्रभावी रूप से लागू करने पर विस्तृत विमर्श किया गया। इस महत्वपूर्ण आयोजन में देशभर से चार सौ से अधिक शिक्षाविद उपस्थित रहे, जिनमें अनेक चांसलर, वाइस-चांसलर तथा शिक्षा क्षेत्र के वरिष्ठ विशेषज्ञ शामिल थे।
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक माननीय मोहन भागवत के सान्निध्य में संपन्न हुआ। ‘शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास’ द्वारा आयोजित यह सम्मेलन, शिक्षा के क्षेत्र में मूल्यों, भारतीय ज्ञान परंपरा और नवीनतम तकनीक को एक नई दिशा देने वाला एक सशक्त पहल सिद्ध हुआ।
कार्यक्रम में देशभर से ख्यातिप्राप्त शिक्षाविदों ने शिक्षा नीति, शिक्षा व्यवस्था के भावी स्वरूप पर विचार-विमर्श किया व इसे क्रियान्वित करने व अपने आपने संस्थानों के कार्यों पर विवेचना की।
इस आयोजन में मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ अतुल कोठारी, उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री धनसिंह रावत, बीजेपी के सांसद (राज्यसभा), व उत्तर प्रदेश भूतपूर्व उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी, आयुष मंत्रालय (भारत सरकार) के सचिव राजेश कोटेचा, भूतपूर्व शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल, दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद व अन्य अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ अतुल कोठारी जी ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में आज निरंतर प्रगति हो रही है। उन्होंने बताया कि पहले एनसीईआरटी केवल तीन भाषाओं हिंदी, अंग्रेज़ी और उर्दू में ही पाठ्यपुस्तकें तैयार करती थी। लेकिन आज, यह कार्य 22 से अधिक भारतीय भाषाओं में किया जा रहा है, जो देश की भाषाई विविधता और समावेशिता को दर्शाता है।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इस प्रकार के शैक्षिक सम्मेलन देश के सभी राज्यों में नियमित रूप से आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि शिक्षा के नवीनतम प्रक्रियाओं का लाभ अधिकाधिक विद्यार्थियों और शिक्षकों तक पहुँच सके।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के सचिव राजेश कोटेचा ने कहा कि बच्चों के पाठ्यक्रम में आयुर्वेद को भी सम्मिलित किया जाना चाहिए, ताकि वे प्रारंभिक अवस्था से ही यह समझ सकें कि शरीर, मन और बुद्धि को स्वस्थ एवं संतुलित कैसे रखा जाए।”

