Faridabad/Alive News: शिक्षा विभाग द्वारा बार-बार जारी निर्देशों के बावजूद जिले में शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त नहीं किया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम स्पष्ट रूप से शिक्षकों को गैर-शिक्षण गतिविधियों में लगाने से प्रतिबंधित करते हैं। इसी क्रम में महानिदेशक शिक्षा ने 26 नवंबर को आदेश जारी करते हुए कहा था कि गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगे शिक्षक तुरंत अपने मूल स्कूलों में लौटकर नियमित शिक्षण कार्य शुरू करें।
हालांकि, शिक्षकों ने शिकायत की है कि न तो स्कूल मुखिया उन्हें वापस बुला रहे हैं और न ही विभागाध्यक्ष उन्हें गैर-शैक्षणिक कार्यों से रिलीव कर रहे हैं। ऐसे में वे स्वयं को असमंजस की स्थिति में पाते हैं।
हरियाणा अभिभावक एकता मंच ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। मंच के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट ओ.पी. शर्मा और प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा ने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी मंडल आयुक्त और उपायुक्त के दबाव में होने के कारण शिक्षकों को वापस स्कूलों में नहीं भेज पा रहे हैं।
मंच के प्रदेश संरक्षक सुभाष लांबा और लीगल एडवाइजर एडवोकेट बी.एस. विरदी ने जिला उपायुक्त से मांग की है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और RTE अधिनियम को ध्यान में रखते हुए, तथा महानिदेशक मौलिक शिक्षा द्वारा जारी आदेशों के अनुरूप, सभी शिक्षकों को उनके मूल स्कूलों में तुरंत भेजा जाए।
मंच ने साथ ही सभी शिक्षक संगठनों से अपील की है कि वे इस आदेश का कड़ाई से पालन करवाने में सक्रिय भूमिका निभाएं, ताकि सरकारी स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था सुधर सके और परीक्षा परिणामों में सकारात्मक सुधार लाया जा सके।

