March 8, 2026

देवउठनी एकादशी आज और कल, दो दिनों तक रहेगी शुभ मुहूर्त , कब करे व्रत और क्या है पूजा विधि जानिए?

Faridabad/Alive News: एक नवंबर को ब्राह्मणों की एकादशी है इस दिन ब्राह्मण व्रत रखते हैं और दो नवंबर को आम लोगों की एकादशी है इस दिन आम लोग व्रत रखेंगे। कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवउठनी एकादशी या प्रबोधित एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु चार माह की योग निद्रा से जागते हैं और सृष्टि के शुभ कार्यों की पुनः शुरुआत होती है। एकादशी दो दिन होने से तुलसी विवाह पर्व की तारीख को लेकर पंचांग में भेद है। यह जानकारी श्री बांके बिहारी मंदिर के मेहनत पंडित विनोद शास्त्री ने दी।

एन आई टी 3 नंबर रेलवे रोड स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर के महंत पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि इस बार तिथियां की घाट बाढ़ की वजह से देवउठनी एकादशी एक और दो नवंबर को मनाई जाएगी। देवउठनी एकादशी आज एक नवंबर सुबह आठ बजे से लेकर कल दो नवंबर रात दो बजे तक रहेगी। इस तिथि पर तुलसी और शालिग्राम का विवाह करना भी एक परंपरा है। इस साल एकादशी पर ध्रुव, रवि और त्रिपुष्कर योग भी बन रहा है।

एकादशी पर करें ये शुभ काम
विनोद शास्त्री ने बताया कि देवउठनी एकादशी पर घर में स्थापित बाल गोपाल का विशेष अभिषेक करना चाहिए। बाल गोपाल को पंचामृत चढ़ाएं। तुलसी के साथ माखन-मिश्री का भोग लगाएं। कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें, साथ ही भगवान शिव को जल चढ़ाएं। बिल्व पत्र, चंदन, आंकड़े के फूल, धतूरे से शिवलिंग का श्रृंगार करें उसके बाद धूप या दीप जलाएं और ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें, साथ ही इस दिन हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें। आप चाहें तो ऊँ रामदूताय नम: मंत्र का जप कर सकते हैं। किसी सुहागिन को सुहाग का सामान जैसे लाल साड़ी, चूड़ियां, बिंदिया, सिंदूर का दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है।

देवउठनी एकादशी से जुड़ी परंपराएं
उन्होंने कहा कि इस दिन तुलसी और भगवान विष्णु के स्वरूप शालीग्राम का विवाह कराया जाता है। मान्यता है कि तुलसी विवाह करने से कन्यादान के समान पुण्य मिलता है साथ ही भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि इस दिन किए गए धर्म-कर्म और पूजा पाठ से वैवाहिक जीवन में आ रही परेशानियां भी दूर हो सकती हैं। तुलसी को धन की देवी मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है, इसलिए तुलसी पूजा करने से महालक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।

क्या है देवउठनी एकादशी की पूजा विधि?
पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि देवउठनी एकादशी के दिन भक्त को सुबह उठकर स्नान कर पीले वस्त्र धारण करना चाहिए।फिर भगवान विष्णु की शालिग्राम स्वरूप या चित्र पर पूजा आरंभ करें, साथ ही दीपक जलाकर गंगाजल, तुलसी दल, पीले फूल और पंचामृत अर्पित उन्हें अर्पित करते हुए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु को खीर, फल का भोग लगाएं। तुलसी माता की आराधना करें और देवजागरण की कथा सुनें। रात्रि के समय दीपदान करें और भगवान को जगाकर आरती करें। अंत में दान और अन्न सेवा का संकल्प लेकर व्रत पूर्ण करें।