Faridabad/Alive News: अल फलाह यूनिवर्सिटी के सफेदपोश आतंकियों ने अपना नेटवर्क बढ़ाने के लिए जरूरतमंदों के लिए खोले गए अस्पताल का भी इस्तेमाल किया। इसी अस्पताल में आने वाले मरीजों को उन्होंने अपना नेटवर्क बढ़ाने का हथियार बनाया। अस्पताल में आने वाले मरीजों से डॉ. मुजम्मिल मदद करने के बहाने मेलजोल बढ़ाता था।
फिर उसको अपने ग्रुप से जोड़ लेता। सूत्रों के अनुसार डॉ. शाहीन और मुजम्मिल के फोन की जांच के दौरान वॉट्सएप कालिंग में कई विदेशी नंबर भी पाए गए हैं। जिनके जरिए वीडियो कॉल कर मरीजों का ब्रेनवॉश भी कराया गया था। सिरोही गांव की मस्जिद से पकड़े गए इमाम को लेकर भी यह बात सामने आई थी।
मुजम्मिल सिरोही मस्जिद में आने वाली तबलीगी जमात में भी विशेष रूप से शामिल होता था। डॉ. शाहीन महिलाओं को अपने साथ जोड़ने का काम करती थी। जांच एजेंसियों ने जिन चार लोगों को मुजम्मिल और डॉ. शाहीन के संपर्क को लेकर गिरफ्तार किया था। वह सभी अस्पताल में ही इन सफेदपोश आंतकियों को मिले थे।
मरीजों को खोजने के लिए साथियों को दिया गया था टास्क
सूत्रों के अनुसार डॉ. शाहीन और उसके पति ने जरूरतमंद मरीजों को खोजने के लिए अपने साथियों को भी टास्क दिया था। अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ से कहा गया था। वह ऐसे मरीजों की मदद करना चाहते हैं। जो अपना इलाज नहीं करा पाते हैं।
यूनिवर्सिटी के छात्रों के अनुसार सहायक प्रोफेसर से एचओडी बनने के बाद डॉ. शाहीन ने जरूरतमंद महिला मरीजों को अपने साथ जोड़ने के लिए अलग ही ग्रुप बना लिया था। इस ग्रुप में यूनिवर्सिटी का कश्मीरी स्टाफ भी शामिल था। जिनका अस्पताल में सीधा दखल था। जांच एजेंसियों ने डॉ. मुजम्मिल और डॉ. शाहीन से जुड़े डाक्टरों के फोन जब्त किए थे।
मरीजों की फर्जी फाइल बनाकर फंडिंग की बात भी आई सामने
अस्पताल के पूर्व कर्मचारी के अनुसार मरीजों फर्जी फाइल बनवाकर फंडिंग भी करवाई जाती थी। रात में ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को पांच फर्जी फाइल बनाने का टास्क दिया जाता था। फर्जी फाइल में मेडिकल चाटर्स नोट्स बनाने होते थे। इसमें डॉक्टर के हस्ताक्षर पहले से होते थे। सूत्रों के अनुसार इन फर्जी फाइलों के जरिए इलाज के नाम पर फंडिंग होती थी।

