Faridabad/Alive News: फरीदाबाद पुलिस के साइबर थाना बल्लभगढ़ ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2.13 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में जयपुर से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान राकेश के रूप में हुई है, जो साइबर ठगों को बैंक खाता उपलब्ध कराने में शामिल था। इस मामले में अब तक 6 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
पुलिस ने बताया कि शिकायत मिलते ही कार्रवाई शुरू की गई और ठगी की 1.05 करोड़ रुपये की राशि समय रहते फ्रीज कराकर पीड़ित के खाते में वापस ट्रांसफर करा दी गई।
जांच में सामने आया कि आरोपी राकेश ने एक खाताधारक का बैंक खाता ठगों तक पहुंचाया था। इसी खाते में ठगी की रकम का एक हिस्सा आया था। बाद में 5.10 लाख रुपये चेक के जरिए निकलवाकर दूसरे व्यक्ति को दे दिए गए। आरोपी जयपुर में रंग-रोगन का काम करता है।
पुलिस जांच में पता चला कि ठगों ने ठगी की रकम को छिपाने के लिए पहले 4 बैंक खातों में भेजा। इसके बाद करीब 1,400 खातों और फिर 2,400 से ज्यादा अन्य खातों में ट्रांसफर कर मनी ट्रेल छिपाने की कोशिश की गई। पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
शिकायत के अनुसार, जनवरी 2026 में पीड़ित की पत्नी को एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताया और कहा कि उनके आधार से जुड़े बैंक खाते का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है। इसके बाद कॉल को कथित मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारियों से जोड़ दिया गया।
ठगों ने पति-पत्नी को कई दिनों तक वीडियो कॉल पर रखा और गिरफ्तारी का डर दिखाकर किसी से बात करने से मना किया। उन्होंने ईडी और सुप्रीम कोर्ट के नाम से फर्जी दस्तावेज भेजे और जांच के नाम पर बैंक खातों की पूरी रकम बताए गए खातों में ट्रांसफर करने के लिए कहा। ठगों ने भरोसा दिया कि 48 से 72 घंटे में पैसे वापस मिल जाएंगे।
डर के कारण पीड़ित ने अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 2.13 करोड़ रुपये ठगों के खातों में भेज दिए। बाद में जब पैसे वापस लेने की कोशिश की तो सभी नंबर बंद मिले। इसके बाद साइबर थाना बल्लभगढ़ में शिकायत दर्ज कराई गई।
पुलिस की अपील: फरीदाबाद पुलिस ने लोगों से कहा है कि कोई भी सरकारी एजेंसी, पुलिस, सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग, आरबीआई या सुप्रीम कोर्ट वीडियो कॉल पर रखकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहता। डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। अगर कोई इस तरह डराकर पैसे मांगे, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी साइबर थाने में शिकायत करें।

