Delhi/Alive News: दिल्ली में पर्यावरण को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ईसीसी) 2015 से वसूला जा रहा है। लेकिन यह पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है। ईसीसी की वजह से ना तो एमसीडी अपने टोल को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआई) की तरह फास्टैग से लिंक कर पा रही है और ना ही एमसीडी के रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन डिवाइस (आरएफआईडी) भी इसके लिए कारागार हो पा रहा है। इसकी वजह से एमसीडी स्वयं ईसीसी के वसूलने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुकी है, जबकि हाल ही में एनएचआई ने भी टोल को हटाने के लिए के लिए ही सुप्रीम कोर्ट पहुंची। ईसीसी से वसूली जाने वाली राशि भी पूरी तरह खर्च नही हो पा रही है। एक जानकारी में सामने आया था कि 50 प्रतिशत राशि का ही उपयोग हुआ है, जबकि शेष राशि दिल्ली सरकार के खाते में पड़ी हुई है।
दिल्ली सरकार ने एक सवाल के जवाब में बताया था कि 2015 से लेकर सितंबर 2023 तक ईसीसी से 1464 करोड़ एकत्रित हुए थे। इसमे से 682.49 करोड़ रुपये उपयोग ही नही हो सके। जबकि दिल्ली में वायु प्रदूषण एक बहुत बड़ी समस्या है।
वाहनों की जांच में होता है प्रदूषण : दिल्ली में प्रवेश करने वाले व्यावसायिक वाहनों से ईसीसी वसूला जाता है, लेकिन जो वाहन चालक यह दावा करते हैं कि वह जरुरी वस्तु लेकर जा रहे हैं उन वाहनों को टोल से आगे रोक कर जांच की जाती है और उसकी वीडियोग्राफी भी की जाती है। इस कारण वाहन चालू रहते है, जिसकी वजह से भी वाहनों के ईंधन जलने से वायु प्रदूषण होता है।

