March 7, 2026

सरस मेले में हस्तकलाकार शंकर बकरे की खाल के चमड़े पर बनाते है देवताओं की चित्रकारी

Faridabad/Alive News: सेक्टर-12 स्थित एचएसवीपी ग्राउंड में आयोजित सरस मेले में देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकार अपनी-अपनी पारंपरिक कलाओं का प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी कड़ी में आंध्र प्रदेश से आए स्टेट अवॉर्डी कलाकार शंकर का कलमकारी कला का स्टॉल लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। शंकर ने सरस मेले में स्टॉल नंबर 117 पर अपनी अनोखी और पारंपरिक कलमकारी कला को प्रदर्शित किया है।

शंकर ने बताया कि कलमकारी कला भारत की सबसे पुरानी और समृद्ध कलाओं में से एक है। यह कला उनके परिवार की पुश्तैनी विरासत है। उन्होंने गर्व से बताया कि उनके पिता को इस कला के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है, जबकि उन्हें स्वयं राज्य पुरस्कार प्राप्त हुआ है।

उन्होंने जानकारी दी कि कलमकारी कला विशेष रूप से चमड़े के ऊपर बनाई जाती है। इसके माध्यम से वे जमीन पर रखने वाले लैंप, लटकाने वाले लैंप, कठपुतलियां, सजावटी स्ट्रिंग और रामायण व महाभारत की कहानियों को चित्रों के जरिए जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हैं। उनकी कलाकृतियों में भारतीय संस्कृति और परंपरा की झलक साफ दिखाई देती है।

शंकर ने बताया कि वे अपनी सभी कलाकृतियां खुद अपने हाथों से तैयार करते हैं। इसके लिए बकरे की खाल का उपयोग किया जाता है। लैंप बनाने की प्रक्रिया के बारे में उन्होंने बताया कि पहले चमड़े में बारीक सुराख किए जाते हैं, फिर उस पर वेजिटेबल पेंट से चित्रकारी की जाती है और बाद में उसे लैंप के आकार में सिल दिया जाता है। एक लैंप तैयार करने में उन्हें करीब 2 से 3 दिन का समय लगता है।

उनके स्टॉल पर रावण, हनुमान, शेर, मोर, गणेश, राधा-कृष्ण और सीता-राम जैसी आकर्षक कलाकृतियां उपलब्ध हैं, जो मेले में आए लोगों को खूब पसंद आ रही हैं। शंकर के पास 350 रुपये से लेकर 4 हजार रुपये तक की विभिन्न कलाकृतियां मौजूद हैं।

सरस मेले में शंकर की कलमकारी कला न सिर्फ लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है, बल्कि भारत की पारंपरिक हस्तकला और सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत बनाए हुए है।