March 7, 2026

अमेरिका में खालिस्तान विरोधी सुखी चहल की संदिग्ध हालात में मौत, धमकियों की हो रही जांच

Delhi/Alive News: कैलिफोर्निया में रहने वाले भारतीय-अमेरिकी बिजनेसमैन और खालिस्तान विरोधी एक्टिविस्ट सुखी चहल की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हो गई। उनके करीबी दोस्त जसपाल सिंह ने बताया कि 31 जुलाई की रात सुखी एक जान-पहचान वाले के घर डिनर पर गए थे। डिनर के बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

सुखी पूरी तरह स्वस्थ थे, इसलिए उनकी अचानक मौत कई सवाल खड़े कर रही है। वे खालिस्तानी विचारधारा के खिलाफ खुलकर बोलते थे और 17 अगस्त को वॉशिंगटन डीसी में होने वाले खालिस्तान जनमत संग्रह का विरोध कर रहे थे।

लगातार मिल रही थी धमकियां
सुखी चहल ‘द खालसा टुडे’ न्यूज़ पोर्टल के संस्थापक और सीईओ थे। उन्हें खालिस्तानी समर्थकों से धमकियां मिल रही थीं, लेकिन वे बिना डरे अपनी बात कहते रहे। उनके एक और करीबी बूटा सिंह कलेर ने कहा कि उनकी मौत से भारत समर्थक समुदाय में शोक की लहर है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से मौत की असली वजह सामने आएगी।

हाल ही में सुखी ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा था, “अमेरिका में कानून का पालन जरूरी है। अगर कोई अपराध करता है, तो उसका वीजा रद्द हो सकता है।” वे भारतीय प्रवासियों को हमेशा अमेरिका के नियमों का पालन करने की सलाह देते थे।

भारत-अमेरिका रिश्तों को मजबूत करने में थे सक्रिय
सुखी चहल का जन्म पंजाब के मानसा जिले में हुआ था। वे 1992 में अमेरिका चले गए। कंप्यूटर इंजीनियर सुखी ने स्टैनफोर्ड और यूसी बर्कले से भी पढ़ाई की थी। वे कई टेक कंपनियों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके थे।

वे ‘पंजाब फाउंडेशन’ नाम की एक संस्था भी चलाते थे, जो गरीब बच्चों को शिक्षा में मदद देती है। इसके अलावा उन्होंने हिंदू, सिख और यहूदी समुदायों के बीच एकता बढ़ाने के लिए भी काम किया।

ब्रिटेन की रिपोर्ट में भारत को बताया गया दमनकारी
उधर, 31 जुलाई को ब्रिटेन की एक रिपोर्ट में भारत को इन 12 देशों की सूची में शामिल किया गया, जिन्हें “दमनकारी” कहा गया है। रिपोर्ट में भारत पर आरोप लगाया गया है कि वह ब्रिटिश लोगों की आवाज दबाने की कोशिश कर रहा है।

इस रिपोर्ट का नाम है ‘ट्रांस नेशनल रिप्रेशन इन द यूके’, जिसमें कहा गया कि कुछ विदेशी सरकारों की गतिविधियां ब्रिटेन में मानवाधिकारों के लिए खतरा हैं। रिपोर्ट में खालिस्तानी संगठनों का भी जिक्र है। भारत सरकार की ओर से इस पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।