Faridabad/Alive News: हरियाणा अभिभावक एकता मंच ने केंद्र सरकार के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) कानून का विरोध करते हुए इसे प्रेस की स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया है। मंच ने केंद्र सरकार से इस कानून को लागू न करने की मांग की है।
मंच के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट ओपी शर्मा और प्रदेश महासचिव एवं स्वतंत्र पत्रकार कैलाश शर्मा ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा मजबूत स्तंभ है। उनके अनुसार, डीपीडीपी कानून लागू होने से पत्रकारों की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। कानून के प्रावधानों में स्पष्टता की कमी का फायदा उठाकर सेंसरशिप बढ़ाने और पत्रकारों को डराने-धमकाने की आशंका है। इससे खोजी पत्रकारिता पर भी असर पड़ सकता है।
मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि नागरिकों के निजता के अधिकार और प्रेस की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। उनका मानना है कि ऐसा कोई भी कानून नहीं होना चाहिए, जिससे पत्रकारों को जनहित से जुड़े मुद्दों की जांच और उन्हें सार्वजनिक करने में बाधाओं का सामना करना पड़े।
प्रेस नोट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने डीपीडीपी अधिनियम से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

