New Delhi/Alive News: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि केवल मीडिया रिपोर्ट के आधार पर किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती। पहले चुनाव आयोग और संबंधित पक्षों का जवाब और रिकॉर्ड देखना जरूरी है।
SIR को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने चुनाव आयोग, केंद्र सरकार, CEC ज्ञानेश कुमार और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने सभी से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
Form-6 में बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने SIR के दौरान इस्तेमाल किए जा रहे Form-6 में किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है। कोर्ट ने कहा कि वह यह देखेगा कि फॉर्म में बदलाव किसने और किस प्रक्रिया के तहत किया।
दरअसल, चुनाव आयोग ने कुछ दिन पहले कहा था कि SIR के लिए Form-6 के साथ लगाए गए डिक्लेरेशन को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिली है। अब कोर्ट ने इस दावे और फॉर्म में किए गए बदलाव से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करने की बात कही है।
बिना सहमति के फैसले लेने के आरोप
याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि SIR से जुड़े करीब 14 फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए। सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा है।
कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग जैसे तीन सदस्यीय संस्थान में फैसले सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर होने चाहिए। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी यह मानना जल्दबाजी होगी कि सभी फैसले CEC ने अकेले लिए थे।
अगर रिकॉर्ड से यह साबित होता है कि कोई फैसला जरूरी प्रक्रिया या सहमति के बिना लिया गया था, तो सुप्रीम कोर्ट उस फैसले पर रोक लगाने या उसे वापस लेने पर विचार कर सकता है।
मीडिया रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई नहीं
CJI सूर्यकांत ने कहा कि किसी अखबार या मीडिया रिपोर्ट के आधार पर सीधे अंतरिम आदेश नहीं दिया जा सकता। रिपोर्ट पूरी तरह सही, आंशिक रूप से सही या गलत हो सकती है। इसलिए अदालत पहले चुनाव आयोग का जवाब और संबंधित दस्तावेज देखेगी।
SIR के खिलाफ दो PIL
SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दो जनहित याचिकाएं दाखिल की गई हैं। एक याचिका राकेश कुमार सिंह ने दायर की है, जिसमें CEC ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग की गई है। उनकी ओर से एडवोकेट विकास सिंह ने दलीलें रखीं। दूसरी याचिका शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने दाखिल की है। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने अदालत में पक्ष रखा।
CEC को हटाने की प्रक्रिया क्या है?
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत तय है। सुप्रीम कोर्ट के पास CEC को सीधे निलंबित करने की कोई विशेष संवैधानिक शक्ति नहीं है। हालांकि, अगर चुनाव आयोग का कोई फैसला कानून या संविधान के खिलाफ पाया जाता है, तो अदालत उस पर रोक लगा सकती है या उसे रद्द कर सकती है।
CEC को पद से हटाने के लिए महाभियोग जैसी संसदीय प्रक्रिया जरूरी होती है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में आवश्यक समर्थन की जरूरत होती है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद एक मीडिया रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि SIR की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद थे। इसमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से SIR को लेकर चिंता जताए जाने की बात कही गई थी।
अब सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले में चुनाव आयोग और केंद्र से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई में अदालत रिकॉर्ड और जवाबों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकती है।

