September 16, 2026

कर्नाटक विधायक की भतीजी पर बिना ड्यूटी सैलरी लेने का आरोप: 6 महीने क्लीनिक नहीं जाने का दावा

कर्नाटक में सरकारी क्लीनिक की मेडिकल ऑफिसर डॉ. अंकिता यरगल

New Delhi/Alive News: कर्नाटक के बागलकोट में नम्मा क्लीनिक की मेडिकल ऑफिसर डॉ. अंकिता यरगल पर नौकरी के साथ निजी मेडिकल कॉलेज से फुल टाइम पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) की पढ़ाई करने का आरोप लगा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह करीब 6 महीने तक सरकारी क्लीनिक में ड्यूटी पर नहीं पहुंचीं, इसके बावजूद उन्हें हर महीने 70 हजार रुपए से ज्यादा वेतन मिलता रहा। मामले की अब जांच की जा रही है।

डॉ. अंकिता बागलकोट से कांग्रेस विधायक उमेश मेटी की भतीजी हैं। उनके पिता राजकुमार यरगल बागलकोट के जिला स्वास्थ्य अधिकारी (DHO) हैं। मामला सामने आने के बाद उनके पिता ने ही डॉ. अंकिता को क्लीनिक की ड्यूटी से हटाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, डॉ. अंकिता पर लगाए गए आरोपों की अभी जांच चल रही है।

अधिकारियों के मुताबिक, डॉ. अंकिता अप्रैल 2025 से बागलकोट की वाम्बे कॉलोनी स्थित नम्मा क्लीनिक में मेडिकल ऑफिसर के तौर पर कॉन्ट्रैक्ट या आउटसोर्स आधार पर काम कर रही थीं। आरोप है कि उन्होंने मार्च में निजी मेडिकल कॉलेज में फुल टाइम PG शुरू की, लेकिन क्लीनिक की नौकरी से इस्तीफा नहीं दिया। इसके बाद 3 मार्च से सितंबर तक वह क्लीनिक में ड्यूटी पर नहीं पहुंचीं।

मामले में अधिकारियों का कहना है कि एक तरफ फुल टाइम PG की पढ़ाई और दूसरी तरफ सरकारी स्वास्थ्य सेवा से जुड़े क्लीनिक की नौकरी जारी रखने के आरोप की जांच की जा रही है। क्लीनिक में मेडिकल ऑफिसर की गैरमौजूदगी के कारण मरीजों और स्थानीय लोगों को परेशानी होने की बात भी सामने आई है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या डॉ. अंकिता ने नौकरी के नियमों का उल्लंघन किया।

जिला पंचायत CEO गजानन बाले की ओर से जारी नोटिस के मुताबिक, SN मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने डॉ. अंकिता को PG की पढ़ाई करने की अनुमति दी थी। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि कॉलेज की अनुमति मिलने से नम्मा क्लीनिक की ड्यूटी से लंबे समय तक गैरहाजिर रहने का मामला खत्म नहीं होता। इसी वजह से उनकी अनुपस्थिति और नौकरी के साथ फुल टाइम पढ़ाई करने के आरोप की अलग-अलग जांच की जा रही है।

जिला पंचायत CEO ने मामले की सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तारीख तय की थी, लेकिन डॉ. अंकिता सुनवाई में उपस्थित नहीं हुईं। अब उन्हें 18 सितंबर को सुबह 10 बजे जिला पंचायत कार्यालय के कमरा नंबर 11 में पेश होने का नोटिस दिया गया है। अधिकारियों ने कहा है कि यदि वह अगली सुनवाई में भी उपस्थित नहीं होती हैं तो मामले में एकतरफा फैसला लिया जा सकता है।

अधिकारियों के मुताबिक, जांच में यह भी देखा जा रहा है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थान से जुड़े नियमों और डॉक्टरों के पेशेवर आचार नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं। जांच पूरी होने के बाद जरूरत पड़ने पर मामला कर्नाटक मेडिकल काउंसिल (KMC) और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) को भी भेजा जा सकता है। इसके बाद विभागीय और पेशेवर स्तर पर कार्रवाई हो सकती है।

डॉ. अंकिता के पिता और DHO राजकुमार यरगल ने 15 सितंबर को कहा कि उनकी बेटी की नियुक्ति उनके DHO बनने से पहले तत्कालीन DHO मंजूनाथ डोड्डेरी ने की थी। उन्होंने कहा कि DHO का पद संभालने के बाद उन्होंने डॉ. अंकिता का वेतन जारी नहीं किया और तालुक स्वास्थ्य अधिकारी को उन्हें ड्यूटी से हटाने के निर्देश दिए थे।

वहीं, स्थानीय कार्यकर्ता राजू नाइक ने आरोप लगाया कि डॉ. अंकिता ने मार्च में पैथोलॉजी में PG शुरू की थी, लेकिन सरकारी क्लीनिक की नौकरी से इस्तीफा नहीं दिया। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और अगली सुनवाई 18 सितंबर को होनी है। अगर जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित विभाग आगे की कार्रवाई कर सकता है।