June 13, 2026

हरियाणा का 1500 करोड़ वर्क स्लिप घोटाला: CM की डेडलाइन बेअसर

Chandigarh/Alive News: हरियाणा के श्रम विभाग से जुड़े करीब 1500 करोड़ रुपये के वर्क स्लिप घोटाले की जांच अब तक शुरू नहीं हो पाई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस मामले में एक महीने के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी हाई लेवल जांच कमेटी की एक भी बैठक नहीं हो सकी।

मुख्यमंत्री ने इस घोटाले की जांच के लिए सीनियर आईएएस पंकज अग्रवाल की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। इसमें आईएएस राजीव रतन और आईपीएस पंकज नैन को सदस्य बनाया गया है। कमेटी को पूरे मामले की जांच कर एक महीने में रिपोर्ट देनी थी। यह घोटाला श्रम विभाग से जुड़ा है, जिसके मंत्री अनिल विज हैं। विज ने ही दिसंबर में इस घोटाले का खुलासा किया था। उनके पास श्रम के साथ-साथ परिवहन विभाग की जिम्मेदारी भी है।

जांच में देरी की 3 बड़ी वजहें

1. अफसरों की व्यस्तता
कमेटी में शामिल अधिकारी कई अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। बजट सत्र नजदीक होने के कारण लगातार बैठकें चल रही हैं। इसी वजह से जांच कमेटी अब तक एक बार भी बैठक नहीं कर पाई।

2. घोटाले का बड़ा दायरा
वर्क स्लिप घोटाला पूरे प्रदेश में फैला हुआ है। अब तक 13 जिलों की जांच पूरी हुई है, जबकि मुख्यमंत्री ने 9 और जिलों से रिपोर्ट मांगी है। कमेटी को पूरे हरियाणा से रिपोर्ट और इनपुट जुटाने हैं, इसलिए जांच शुरू करने में समय लग रहा है।

3. जांच की रूपरेखा तय नहीं
जांच किस तरह से की जाएगी, इसका तरीका अभी तक तय नहीं हो पाया है। 6 जनवरी को इस विषय पर मीटिंग बुलाई गई थी, लेकिन कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। अब इसी हफ्ते दोबारा बैठक बुलाने की बात कही गई है।

दिसंबर में श्रम मंत्री अनिल विज ने बताया था कि हिसार, कैथल, जींद, सिरसा, फरीदाबाद और भिवानी समेत कई जिलों में वर्क स्लिप में भारी गड़बड़ी मिली है। इसके बाद सभी जिलों के डीसी को जांच के निर्देश दिए गए। जांच में सामने आया कि 5.99 लाख वर्क स्लिप में से सिर्फ 53 हजार सही पाई गईं,  5.46 लाख वर्क स्लिप फर्जी निकलीं और 1.93 लाख मजदूरों के नाम फर्जी पाए गए। कई जगहों पर पूरे गांव के लोगों का फर्जी रजिस्ट्रेशन कर दिया गया था, ताकि वे सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकें। एक मजदूर को योजनाओं से करीब 2.5 लाख रुपये तक का फायदा मिल सकता है, जिससे सरकार को भारी नुकसान हुआ।

जांच के दौरान नए आवेदनों पर रोक लगा दी गई है। सरल केंद्रों को नए आवेदन न लेने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, पहले से मंजूर पेंशन योजनाएं नहीं रोकी गई हैं और मृत्यु व अंतिम संस्कार सहायता जैसी योजनाओं का लाभ जारी है। घोटाले के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी मामले को गंभीरता से लिया। सीएम ने श्रम विभाग से सभी जिलों की पूरी रिपोर्ट और वित्तीय नुकसान का सही आंकड़ा मांगा है, लेकिन यह रिपोर्ट अभी तक लंबित है।

क्या कहना है जांच कमेटी अध्यक्ष का

आईएएस पंकज अग्रवाल ने कहा कि बजट सत्र के कारण देरी हुई है, लेकिन 6 जनवरी को जांच कमेटी की पहली औपचारिक बैठक सिविल सचिवालय में बुलाई गई है और सभी सदस्यों को सूचना दे दी गई है।