March 8, 2026

सरूरपुर औद्योगिक क्षेत्र में प्रतिबंधित स्क्रैप जलाने पर सख्ती, डीसी ने गठित कीं छह विभागीय टीमें

Faridabad/Alive News: सरूरपुर औद्योगिक क्षेत्र में प्रतिबंधित स्क्रैप जलाने से फैल रहे गंभीर वायु प्रदूषण के मामले पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद मामला जिला उपायुक्त तक पहुंचा, जिस पर संज्ञान लेते हुए यूनिटों पर कार्रवाई के लिए छह विभागीय टीमों का गठन किया गया है।

इन टीमों में बिजली निगम, नगर निगम, जिला नगर योजनाकार (एन्फोर्समेंट), प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हैं। जिला प्रशासन के निर्देशानुसार ये टीमें 5 जनवरी तक क्षेत्र की प्रत्येक औद्योगिक यूनिट की जांच करेंगी। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि कोई यूनिट अवैध रूप से संचालित तो नहीं हो रही और क्या वहां प्रतिबंधित स्क्रैप जलाया जा रहा है। नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर संबंधित यूनिट को सील किया जाएगा।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस जांच की विस्तृत रिपोर्ट 15 जनवरी 2026 तक नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में जमा करानी होगी। यह कार्रवाई एनजीटी में चल रहे एक मामले के तहत की जा रही है, जिसकी अगली सुनवाई 15 जनवरी 2026 को निर्धारित है। एनजीटी रिपोर्ट का अवलोकन कर आगे के आदेश जारी करेगा।

रात होते ही शुरू हो जाता है स्क्रैप जलाने का खेल
जिले के कई गांवों में कृषि योग्य भूमि पर अवैध प्लॉटिंग कर औद्योगिक गतिविधियां चलाई जा रही हैं। सरूरपुर, नंगला, कुरेशीपुर, मादलपुर, नेकपुर, गाजीपुर और फतेहपुर गांवों में ऐसी कई यूनिट संचालित हैं, जहां प्रतिबंधित स्क्रैप जलाया जाता है। इन यूनिटों में एल्युमिनियम स्क्रैप को भट्टियों में कोयला डालकर गलाया जाता है और सिल्लियां तैयार की जाती हैं। यह प्रक्रिया अधिकतर रात के समय की जाती है, जिससे आसपास के इलाकों में घना धुआं फैल जाता है और वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा तक पहुंच जाता है।

एनजीटी में याचिका के बाद हुआ खुलासा
सिरोही गांव निवासी समाजसेवी नरेंद्र सिरोही ने बार-बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने पर एनजीटी में याचिका दायर की थी। उनकी याचिका पर एनजीटी ने 12 फरवरी 2025 को विभागीय अधिकारियों की एक कमेटी गठित की थी। इस कमेटी ने 19 मई 2025 को अपनी रिपोर्ट एनजीटी को सौंपी, जिसमें स्वीकार किया गया कि क्षेत्र में कई यूनिट अवैध रूप से संचालित हो रही हैं और उनमें प्रतिबंधित स्क्रैप जलाया जा रहा है।

जांच के दौरान कई स्थानों पर प्रतिबंधित स्क्रैप की राख के ढेर मिले, जिनके नमूने भी लिए गए। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि इस तरह का स्क्रैप जलाने से वायु प्रदूषण में भारी बढ़ोतरी होती है।

‘टीमें आती हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होती’
नरेंद्र सिरोही का आरोप है कि सर्दियों के मौसम में वायु प्रदूषण का स्तर और अधिक बढ़ जाता है। आम जगहों पर आग लगाने पर प्रशासन सख्ती दिखाता है, लेकिन इन औद्योगिक इलाकों में खुलेआम प्रतिबंधित स्क्रैप जलाया जाता है और ठोस कार्रवाई नहीं होती। उनका कहना है कि इसमें मिलीभगत की आशंका है, क्योंकि निरीक्षण के लिए टीमें आती जरूर हैं, लेकिन बिना कार्रवाई किए लौट जाती हैं।

क्या कहना है प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का

जिला उपायुक्त के आदेश पर विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारियों की छह टीमों ने जांच शुरू कर दी है। यहां प्रत्येक क्षेत्र में जाकर प्रत्येक यूनिट की जांच हो रही है। इसकी कंपाइल रिपोर्ट पांच जनवरी को तैयार हो जाएगी। अवैध पाए जाने पर यूनिट सील की जाएंगी। एक भी यूनिट को नहीं बख्शा जाएगा। प्रतिबंधित स्क्रैप को लेकर काफी सख्ती की जा रही है। इसलिए यूनिट संचालक ऐसे स्क्रैप को कतई न जलाएं।”

-हरीश शर्मा, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड