Faridabad/Alive News: जिले के सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की कमी बोर्ड परीक्षा का गणित बिगाड़ सकती है। आधे से अधिक शैक्षणिक सत्र बीत जाने के बाद भी सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की कमी दूर नहीं हो पाई है, जिससे सिलेबस पूरा नहीं हो पा रहा है। बोर्ड परीक्षा की तैयारी प्रभावित हो रही है। जल्द सरकार स्कूलों में अध्यापकों की कमी दूर नहीं की गई तो इसका असर बोर्ड परीक्षा पर दिखाई देगा।
बीते कुछ वर्षों में जिला का परीक्षा परिणाम बेहद खराब रहा है। जिला में 378 राजकीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इनमें लगभग 1.25 लाख से अधिक विद्यार्थी पढ़ते है। इनमें दसवीं से बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों की संख्या करीब 28,000 है। जिला के राजकीय स्कूलों में 30 प्रतिशत अध्यापकों सीटें खाली है।
वर्तमान में सिर्फ 3600 अध्यापक पढ़ा रहे हैं। इसी बीच अध्यापकों की ड्यूटी गैर शैक्षणिक कार्यो में लगा दी जाती है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्थिति यह है कि एक एक अध्यापक पर दो दो विषयों और कक्षाओं का अतिरिक्त कार्यभार है।
बीते कुछ वर्षों का रिकार्ड देखा जाए तो हर बार बोर्ड परीक्षा के परिणाम में गिरावट दर्ज की गई है। केवल कोरोना के समय ही जिला का परीक्षा परिणाम शत प्रतिशत रहा था। क्योंकि कोरोना काल (2021) में सभी विघाथियो को अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया गया था। वर्ष 2025 में जिला का बोर्ड परीक्षा का परिणाम 91.63 प्रतिशत रहा था जबकि वर्ष 2024 में 93.38 दर्ज किया गया। 2023 में 67.89 प्रतिशत, 2022 में 84.59 प्रतिशत, 2020 में 81.61 प्रतिशत, 2019 में 67.86 प्रतिशत 2018 में 57.38 प्रतिशत और 2017 में 47.85 प्रशतित परीक्षा परिणाम आया था।
क्या कहना है अध्यापक का
सरकारी स्कूलों से अध्यापकों की कमी दूर होना चाहिए। बच्चे घर आकर बताते है कि एक ही अध्यापक दो दो कक्षाओं को एक साथ बैठाकर पढ़ाते हैं। इससे कोई भी कक्षा ठीक से नहीं पढ़ पाती है। समस्या पर ध्यान देने की जरूरत है।
– शौंलेद्री, अभिभावक
ज्यादातर सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की कमी है, इसी बीच गैर शैक्षणिक कार्यो में ड्यूटी लगा दी जाती है। जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है और सिलेबस भी तय समय पर पूरा नहीं होती है। अध्यापकों की ड्यूटी गैर शैक्षणिक कार्यो में नहीं लगनी चाहिए और कभी भी पूरी करने की जरूरत है।
-रघु वत्स, प्रधान, अतिथि अध्यापक संघ।
सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की कमी से वाकिफ की ओर से कई बार उच्च अधिकारियों को इस संबंध में लिखा जा चुका है। बीते वर्ष, सरप्लस अध्यापकों की ड्यूटी नजदीकी स्कूलों में लगाई गई थी,ताकि बोर्ड परीक्षा के लिए विद्यार्थियों की अच्छी तैयारी हो सके। जल्द स्कूलों में अध्यापकों की कमी दूर हो सकती है।
-डा. मनोज मित्तल, उप जिला शिक्षा अधिकारी

