June 13, 2026

नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा करना क्यों है जरूरी जानिए

Faridabad/Alive News : शरदीय नवरात्रि के नौवे दिन मां दुर्गा के नौवे रूप में सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से भक्तों को सिद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है इसलिए इन्हें सिद्धि दात्री के नाम से जाना जाता है। मां सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना करने से करने से भक्तों के दुख दूर होते हैं। नवरात्रि के नौवे दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के बाद कन्या पूजन करना बहुत ही आवश्यक माना जाता है। इस दिन भक्त अपने घर में मां दुर्गा के स्वरूप के रूप में छोटी-छोटी कन्याओं को बुलाकर उन्हें भोजन ग्रहण करवाकर उन्हें दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लेते हैं। कन्याओं के भोजन ग्रहण करने के बाद ही व्रतवासी अपने व्रत का पारण करते हैं।

कैसा है मां सिद्धिदात्री का स्वरूप

देवी माता लक्ष्मी की तरह मां सिद्धिदात्री कमल पर विराजमान हैं और मां की चार भुजा हैं। सिद्धिदात्री मां के दाहिनी ओर वाले हाथ में कमल पुष्प और ऊपर वाले हाथ में शंख सुशोभित है। माता के बाईं ओर नीचे वाले हाथ में गदा और ऊपर वाले हाथ में चक्र सुशोभित है। साथ ही, माता ने लाल

क्या है मां सिद्धिदात्री की आठ सिद्धियां

सभी देवताओं, ऋषियों, असुरों और गंदर्भ को देवी की पूजा करने से ही सिद्धियां प्राप्त होती हैं। पौराणिक कथाओं के मुताबिक अणिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, महिमा, गरिमा, लघिमा, वशित्व और ईशित्व ये मां की आठ सिद्धियां हैं। जो भक्त नवरात्रि में नौ दिन का व्रत रखता है, पूजा-अर्चना और अंतिम दिन कन्या पूजन करता उसे मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है। साथ ही, सभी बिगड़े काम बनने लगते हैं।

क्या है मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि

सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर मंदिर और पूरे घर की सफाई कर लें। इसके बाद, मंदिर में गंगाजल का छिड़काव करें और एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। चौकी पर कपड़ा बिछाने के बाद चारों ओर गंगाजल छिड़क दें। इस दिन हवन करने का भी विशेष महत्व होता है। ऐसे में माता के साथ सभी देवी-देवताओं की पूजा करनी चाहिए। मां सिद्धिदात्री की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करने के बाद उन्हें, पूजा सामग्री अर्पित करें और विधि-विधान से माता की पूजा करें साथ ही, भोग लगाएं और मंत्रों का जाप करने के बाद आरती जरूर उतारें।

क्या है मां सिद्धिदात्री का प्रिय भोग

शारदीय नवरात्रि के आखिरी दिन हलवा, पूड़ी, मौसमी फल, चने, खीर और नारियल का भोग लगाने का विशेष महत्व होता है। ऐसा करने से देवी प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा भक्तों पर बनी रहती है। माता की पूजा जामुनी रंग के वस्त्र पहनकर करना शुभ माना जाता है।

क्या है मां सिद्धिदात्री का प्रिय मंत्र

सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि, सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।

वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्धकृत शेखराम्, कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्वनीम्।