Faridabad/Alive News: फरीदाबाद का एकमात्र सरकारी बी. के अस्पताल सुविधाओं के अभाव में बिमार है। यहां इलाज के लिए आने वाले मरीज ठीक होने की बजाय बीमार हो रहे है। हमारे संवाददाता ने सोमवार की सुबह ग्यारह बजे बी. के अस्पताल की ओपीडी की पड़ताल की और देखा कि ओपीडी तीन दिन की छुट्टियों के बाद खुली है और मरीजों की डाक्टर के कमरे के बाहर भीड खड़ी है कुछ मरीज बैठने की सुविधा न होने की वजह से फरस पर बैठे तो ज्यादातर अपना नम्बर आने के इंतजार में लाइन में खड़े हैं।
ओपीडी में हजारो की संख्या में मरीज सुबह से पहुंचे हुए थे। ओपीडी में मरीजों की संख्या ज्यादा होने और कही से भी वेंटिलेशन की सुविधा न होने की वजह से मरीज हाल बेहाल दिखाई दिये।
फिजिशियन डॉक्टर के कमरे के बाहर कई लाइन लगी हुई दिखाई दी। जिस में मरीज बीमार होने के बावजूद भी लंबी लाईनो में खडे दिखाई दिये। मरीजो का आरोप था कि ओपीडी में वेटिंग के लिए बैठने का पर्याप्त स्थान नहीं था। जिसकी वजह से कई मरीजों का नंबर ना आने की वजह से निराश होकर वापिस लौट गये।
एक तरफ इलाज और दूसरी तरफ अस्पताल की ओपीडी में उठती दुर्गंध भी उमस भरी गर्मी में मरीजों के लिए चुनौती बन रहा था। मरीजों का आरोप था कि सुबह 8 बजे से लंबी लाइनों में लगे है। रसूखदार और डॉक्टरों के जानकार अपना इलाज करवा रहे थे और वही दूसरी तरफ आम जनता डॉक्टरों तक पहुंच नहीं पा रही थी उन्हें ओपीडी बंद होने तक नंबर न आने के कारण बिना इलाज के वापस लौटना पड़ा।
दुर्गंध से बजबजाते दिखे बी.के अस्पताल की ओपीडी के शौचालय
हमारे संवाददाता ने अस्पताल की ओपीडी के शौचालय की साफ सफाई का जायजा लिया तो पाया कि ओपीडी का शौचालय शायद कई महीनों से साफ नही किया गया है। जिसकी वजह से दुर्गंध और गंदगी की वजह से इस्तेमाल करने लायक नहीं दिखाई दिये। महिला मरीज यह कहती नजर आई कि यह सरकारी अस्पताल है, गरीबो के साथ यहां पर हमेशा ऐसा ही होता आ रहा है।
दूसरी तरफ अस्पताल प्रशासन द्वारा हर महीने अस्पताल और शौचालयों की साफ सफाई में लाखों रुपये का बजट खर्च किया जा रहा है। लेकिन साफ सफाई दूर तक नही दिखाई देती। जब ओपीडी का हाल ऐसा है तो अस्पताल के बाकी वार्ड के क्या होंगे?
क्या कहना था मरीजों का
सुबह से अपनी पत्नी के इलाज के लिए आया हुआ हूं। लेकिन ओपीडी में मरीजों की संख्या ज्यादा होने और कही से भी हवा की वेंटिलेशन की सुविधा न होने की वजह से ओपीडी में दुर्गंध उठ रही है। जिसकी वजह से मेरी पत्नी और मुझे सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी। बिना इलाज के घर जाना पड रहा है।
–सुरज, निवासी लकड़पुर।
यहां पर शौचालय का बुरा हाल रहता है। गंदगी और बदबू के कारण शौचालय इस्तेमाल करने लायक नहीं है और न ही कोई पानी की सुविधा है। जिसकी वजह से महिला मरीजों को बहुत परेशानी होती है।
-नाजनी, ओल्ड फरीदाबाद।
तीन घंटे लाइन में लगे हुए हो गए है लेकिन अभी तक नंबर नहीं आया है। मेरे सामने से अभी तक लगभग 20 से ज्यादा लोग जिनकी ऊपर तक पहुंच है, वह लाइन तोड़कर अपना इलाज करवा कर वापस लौट गए है। हम जैसे गरीब सुबह से उमस भरी गर्मी में लाइनों में लगकर धखे खा रहे है लेकिन 3 घंटो बाद भी हमारा नंबर नहीं आया है।
–अरविंद, पलवल।

