Faridabad/Alive News: भूपानी स्थित सतयुग दर्शन के वसुंधरा में आयोजित वार्षिक रामनवमी यज्ञ महोत्सव का शुभारंभ शुक्रवार सुबह 8 बजे हुआ। इस महोत्सव की शुरुआत सतवस्तु के कुदरती ग्रन्थ एवं रामायण के अखंड पाठ से हुई। यज्ञ के आरंभ में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को सतवस्तु के कुदरती ग्रन्थ के अनुसार ओ३म शब्द की अद्वितीय महत्ता से परिचित कराया गया।
उक्त ग्रन्थ के माध्यम से बताया गया कि ओ३म या शब्द ब्रह्म इस सृष्टि का मौलिक और प्रधान कारण है। यही वह नित्य चेतन सत्ता है जो संपूर्ण ब्रह्मांड का निर्माण, पालन और संलयन करती है। ओ३म शब्द से ही सृष्टि की उत्पत्ति होती है और यही शब्द ब्रह्म संसार के प्रत्येक प्राणी में समाहित है। ओ३म की विशेषता यह है कि यह निर्गुण होते हुए भी सर्गुण रूप में सर्वव्यापक है और समस्त त्रिलोकों तथा कालत्रयी में समाहित है।
सतवस्तु के कुदरती ग्रन्थ के श्लोक ने इस अवधारणा को स्पष्ट किया-
“असलियत स्वरूप है जे ब्रह्म जैंदा रूप रेखा नहीं रंग
ओ३म विच विशेष हूँ, ओ३म तूं निर्लेप हूँ”
इस श्लोक का अर्थ है कि ब्रह्म, जिसे हम ओ३म के रूप में जानते हैं, बिना किसी रूप, रंग और रेखा के असलियत स्वरूप है। ओ३म में विशेषताओं का समावेश होते हुए भी वह निर्लेप और अकर्त्ता है।
सभी प्रमुख धर्म ग्रंथों में ओ३म के महत्व का उल्लेख किया गया है। चाहे वह वेद, उपनिषद, गीता या फिर गुरू ग्रंथ साहिब हो, सभी में इस अक्षर के महत्व को बताया गया है। जब इंसान इस मंत्र का सिमरन करता है, तो वह अपने भीतर आत्मा की दिव्यता और ब्रह्मज्ञान को पहचान सकता है।
ग्रंथ में एक शेर भी है-
“चार वेद कुदरती आये, छ: शास्त्र कुदरत ने रचाये।
इन्हां विचों इन्सानों अलफ नूं पा लीजियो।
अलफ़ अक्षर नूं जप जप के, ईश्वर दी पहचान कीजियो।”
सभी उपस्थित लोगों को यह संदेश दिया गया कि वे वेद-शास्त्रों में उलझने के बजाय इस मूलमंत्र, ओ३म का जाप करें ताकि वे आत्मा से अपने संबंध को जोड़ सकें और आत्मा के अद्वितीय प्रकाश में परमात्मा की पहचान कर सकें।
यज्ञ महोत्सव में एक नृत्य नाटिका के माध्यम से यह समझाया गया कि जैसे सूर्य का प्रकाश बाहर की सारी दुनिया को रोशन कर देता है, वैसे ही ओ३म का जाप आत्मा के भीतर ब्रह्म का प्रकाश उत्पन्न करता है, जिससे व्यक्ति आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचान सकता है।
इस प्रकार, महोत्सव में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को यह प्रेरणा दी गई कि वे ओ३म के जाप के द्वारा अपनी आत्मा को पहचानें और अपने जीवन में परिपूर्णता एवं शांति का अनुभव करें।