विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस आज: चिड़चिड़ापन, नींद में बदलाव और एकाग्रता की कमी हो सकती है मानसिक परेशानी के शुरुआती संकेत
Prabhjot Kour/Alive News
Faridabad: लगातार मोबाइल चलाना, सोशल मीडिया पर दूसरों से अपनी तुलना करना और देर रात तक स्क्रीन के सामने रहना मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। इसका असर नींद, एकाग्रता और रोजमर्रा के व्यवहार पर भी दिखाई दे सकता है। शुरुआत में लोग इन बदलावों को सामान्य तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लंबे समय तक उदासी, चिड़चिड़ापन, बेचैनी और लोगों से दूरी बनाने जैसी समस्याएं बनी रहें तो विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समय रहते परेशानी पहचानने की जरूरत पर जोर दिया।
सेक्टर-16 स्थित मारेंगो एशिया अस्पताल की न्यूरोलॉजी विभाग की डायरेक्टर डॉ. सुषमा शर्मा ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने और प्रभावित लोगों के अनुभवों को गंभीरता से सुनने की आवश्यकता बताई। वहीं, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल, फरीदाबाद की मेंटल हेल्थ एंड बिहेवियरल साइंसेज विभाग की अटेंडिंग कंसल्टेंट डॉ. ध्वनि सतीजा के अनुसार, लगातार नोटिफिकेशन, सोशल मीडिया पर तुलना और हर समय ऑनलाइन रहने का दबाव तनाव, चिंता और मानसिक थकान बढ़ा सकता है। खासकर सोने से पहले मोबाइल का अधिक इस्तेमाल नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।
व्यवहार में बदलाव को न करें नजरअंदाज
विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार चिड़चिड़ापन, उदासी, नींद में बदलाव, थकान, एकाग्रता में कमी और रोजमर्रा के कामों में रुचि कम होना मानसिक परेशानी के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। सामान्य तनाव किसी परिस्थिति से जुड़ा हो सकता है, लेकिन जब परेशानी लंबे समय तक बनी रहे और पढ़ाई, कामकाज या रिश्तों को प्रभावित करने लगे, तो विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
परिवार का सहयोग है जरूरी
मानसिक परेशानी से जूझ रहे व्यक्ति की बात सुनना और उसकी भावनाओं को समझना जरूरी है। परिवार और दोस्तों को उसे कमजोर समझने या उसकी परेशानी को मामूली बताने के बजाय सहयोग करना चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करने का माहौल बनाना भी जरूरी है, ताकि लोग बिना झिझक मदद मांग सकें। विशेषज्ञों के अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल भी शारीरिक स्वास्थ्य जितनी ही महत्वपूर्ण है।

