November 9, 2026

फिटनेस की कमी नहीं, अस्थमा का संकेत हो सकता है सांस फूलना  

वर्ल्ड लंग डे: 18 से 35 साल के युवाओं में बढ़ रहीं खांसी, घरघराहट और सीने में जकड़न की शिकायतें

Prabhjot Kour/Alive News: सीढ़ियां चढ़ते ही सांस फूलने लगे, थोड़ी दूर चलते ही रुकना पड़े या रात में लगातार खांसी परेशान करे तो इसे सिर्फ थकान या कम फिटनेस समझकर नजरअंदाज न करें। सांस से जुड़ी ऐसी शिकायतें अब केवल उम्रदराज लोगों तक सीमित नहीं हैं। फरीदाबाद में 18 से 35 साल के युवा भी सांस फूलने, लगातार खांसी, सीने में जकड़न और सांस लेते समय घरघराहट की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिन्हे बाद चैकअप के बाद पता चलता है कि उन्हे अस्थमा है। डॉक्टरों के अनुसार लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण, धूल-धुआं, एलर्जी, धूम्रपान और वेपिंग के संपर्क से युवाओं में अस्थमा समेत सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। आज शुक्रवार को वर्ल्ड लंग डे पर विशेषज्ञों ने कम उम्र से ही फेफड़ों की सेहत को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।

ग्रेटर फरीदाबाद सेक्टर-86 स्थित एकॉर्ड अस्पताल की वरिष्ठ श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. विद्या नायर ने बताया कि पहले सांस फूलने और लंबे समय तक खांसी जैसी शिकायतें अधिकतर मध्य आयु और बुजुर्ग मरीजों में देखने को मिलती थीं। अब 18 से 35 वर्ष के युवा भी इन समस्याओं के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 50 से 60 युवा सांस संबंधी परेशानी लेकर आ रहे हैं। जिन्हे से 30 मरीजों को अस्पताल आकर पता चलता है कि उन्हें इतनी कम उम्र में ही अस्थमा हो गया है। यदि युवा को पहले की तुलना में सामान्य काम करने या सीढ़ियां चढ़ने पर जल्दी सांस फूलने लगे, बार-बार रुकना पड़े या इसके साथ खांसी, घरघराहट और सीने में जकड़न हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अस्थमा किसी भी उम्र में हो सकता है। व्यायाम या शारीरिक गतिविधि के दौरान भी अस्थमा के लक्षण बढ़ सकते हैं।

वही सेक्टर-8  स्थित सर्वोदय हॉस्पिटल के डायरेक्टर और हेड – पल्मोनोलॉजी डॉ. मनीषा मेंदीरत्ता आजकल अस्थमा जैसी बीमारियां बच्चों, किशोरों और युवाओं में काफी देखने को मिल रहा है। अस्थमा के लक्षण कई बार शुरुआत में हल्के होते हैं, इसलिए उन्हें सामान्य एलर्जी, थकान या मौसम में बदलाव का असर समझ लिया जाता है। बार-बार होने वाली सूखी खांसी, खासकर रात में या सुबह के समय खांसी, दौड़ने-व्यायाम करने पर सांस फूलना और सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज अस्थमा के संकेत हो सकते हैं। समय पर बीमारी की पहचान और नियमित उपचार से अस्थमा को नियंत्रित रखते हुए सामान्य जीवन जिया जा सकता है। अस्पताल में रोज 60 से 70 युवा सांस संबंधी परेशानी लेकर आते है जिनमें से आधे से ज्यादा को अस्थमा रहता है जो की आज की पीढ़ी के लिए काफी खतरनाक है। 

केस स्टडी-1: जिम में एक्सरसाइज के दौरान फूलने लगी सांस, जांच में मिला अस्थमा

24 वर्षीय युवक नियमित रूप से जिम जाता था। पिछले कुछ महीनों से वर्कआउट और दौड़ने के दौरान उसकी सांस जल्दी फूलने लगी और कई बार सीने में जकड़न भी महसूस होती थी। शुरुआत में उसने इसे कमजोरी और ज्यादा एक्सरसाइज का असर समझकर नजरअंदाज किया। परेशानी बढ़ने पर डॉक्टर से जांच कराई गई। जांच में अस्थमा के लक्षण सामने आए। डॉक्टर ने उसे नियमित उपचार के साथ ऐसे कारकों से बचने की सलाह दी, जिनसे उसकी सांस संबंधी परेशानी बढ़ती थी।

केस स्टडी-2: रात में लगातार खांसी को एलर्जी समझती रही युवती

29 वर्षीय युवती को कई महीनों से रात में सूखी खांसी आती थी। सुबह उठने और तेज चलने पर भी उसे सांस लेने में परेशानी होती थी। वह इसे मौसम बदलने और सामान्य एलर्जी का असर मानकर खुद ही दवा लेती रही। बाद में सांस फूलने और सीने में जकड़न की शिकायत बढ़ने पर पल्मोनोलॉजिस्ट से जांच कराई गई। चिकित्सकीय जांच में अस्थमा की पुष्टि हुई। डॉक्टर ने नियमित उपचार के साथ धूल, धुएं और अन्य ट्रिगर से बचने की सलाह दी।

केस स्टडी-3: टीबी समझी गई बीमारी, जांच में मिला अस्थमा

40 वर्षीय महिला को लगातार खांसी और रात में सीने में जकड़न रहती थी। शुरुआती जांच के बाद उन्हें टीबी की दवा दी गई, लेकिन परेशानी कम नहीं हुई। बाद में एकॉर्ड अस्पताल में डॉ. विद्या नायर ने दोबारा जांच की तो अस्थमा के लक्षण मिले। इसके बाद उन्हें नियमित उपचार और ट्रिगर से बचने की सलाह दी गई।

युवाओं को इन संकेतों पर देना चाहिए ध्यान

युवाओं को लगातार दो-तीन सप्ताह तक खांसी, सीढ़ियां चढ़ने या थोड़ा चलने पर बार-बार सांस फूलना, सांस लेते समय घरघराहट या सीटी जैसी आवाज, सीने में जकड़न और रात में खांसी या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये अस्थमा के संकेत हो सकते हैं।