March 16, 2026

पियाला रेलवे क्रॉसिंग पर पुल निर्माण की धीमी रफ्तार से ग्रामीण परेशान

Faridabad/Alive News: पिछले डेढ़ साल से पियाला गांव के रेलवे क्रॉसिंग पर बन रहे पुल का निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। निर्माण में हो रही देरी के कारण आसपास के ग्रामीणों और किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

रेलवे ट्रैक के दोनों ओर गांव के किसानों के खेत स्थित हैं। इस समय रबी सीजन की गेहूं की फसल पकने के करीब है। ऐसे में फसल की कटाई करने और उसे घर तक पहुंचाने के लिए किसानों को करीब पांच किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ेगा, जिससे उनकी मेहनत और लागत दोनों बढ़ रही हैं।

पियाला रेलवे क्रॉसिंग पर पुल निर्माण कार्य सितंबर 2024 में शुरू किया गया था। निर्माण शुरू होते ही क्रॉसिंग को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। तब से गांव के किसानों को अपनी फसलों की बुवाई और कटाई के लिए खेतों तक पहुंचने के लिए जजरू या असावटी अंडरपास के रास्ते आना-जाना पड़ रहा है।

इस पुल निर्माण परियोजना को अगस्त 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, निर्माण स्थल पर काम की मौजूदा रफ्तार को देखकर ग्रामीणों को उम्मीद कम ही दिखाई दे रही है कि यह काम तय समय सीमा के भीतर पूरा हो पाएगा। ऐसे में लोगों को अभी लंबे समय तक इन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

पियाला और असावटी क्षेत्र में पियाला रेलवे क्रॉसिंग के पास कई सरकारी और निजी क्षेत्र की फैक्ट्रियां भी स्थित हैं। इन फैक्ट्रियों में काम करने के लिए सागरपुर, डीग, प्रह्लादपुर माजरा डीग, फतेहपुर बिल्लोच, लाधौली, काकरीपुर, मंडकौल, जावा, अटेरना, मोहना, सदरपुर, सुनपेड़ और शाहपुर कलां जैसे गांवों से हजारों लोग रोजाना आते हैं।

क्रॉसिंग बंद होने के कारण इन मजदूरों को अपने दोपहिया वाहन क्रॉसिंग के पास ही खड़े करने पड़ते हैं और आगे का रास्ता पैदल तय करना पड़ता है। यदि पुल का निर्माण समय पर पूरा हो गया होता, तो इन लोगों को अपनी फैक्ट्रियों तक पहुंचने के लिए सीधा और सुगम रास्ता मिल जाता। फिलहाल निर्माण कार्य की धीमी गति से क्षेत्र के किसानों और मजदूरों दोनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

क्या कहना उप महाप्रबंधक का

हमने खंभों के ऊपर ‘कैप’ (शीर्ष) बनाने का काम शुरू कर दिया है। अब ‘I-गर्डर’ के निर्माण कार्य को शुरू करने के लिए आवश्यक सामग्री फैक्ट्री में लाई जाएगी। इन I-गर्डरों का निर्माण फैक्ट्री में ही किया जाएगा और उसके बाद उन्हें निर्माण स्थल पर पहुंचाया जाएगा। हमारा लक्ष्य दिसंबर 2026 तक इस पुल का निर्माण कार्य पूरी तरह से संपन्न करना है।
प्रवीण कुमार, उप महाप्रबंधक, रेलवे निर्माण