Faridabad/Alive News: सूरजकुंड की ऐतिहासिक वादियों में आयोजित 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले में तुर्की के शिल्पकार अपनी पारंपरिक कला और अनूठे हुनर से पर्यटकों का दिल जीत रहे हैं। मेले के अंतरराष्ट्रीय पवेलियन में तुर्की के स्टॉल पर प्रदर्शित रंग-बिरंगे हैंडमेड मोज़ेक लैंप और बारीक नक्काशी वाले सिरेमिक उत्पाद दर्शकों के लिए प्रमुख आकर्षण बने हुए हैं।
मेले में पहुंचे पर्यटक तुर्की की इस पारंपरिक कला को न केवल करीब से देख रहे हैं, बल्कि शिल्पकारों से संवाद कर उनकी कला और संस्कृति के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। तुर्की से आए शिल्पकार हाकन ने बताया कि मोज़ेक लैंप पूरी तरह हाथों से बनाए जाते हैं, जिनमें छोटे-छोटे रंगीन कांच के टुकड़ों को जोड़कर आकर्षक पैटर्न तैयार किए जाते हैं। ये लैंप न सिर्फ रोशनी देते हैं, बल्कि तुर्की की सदियों पुरानी ओटोमन साम्राज्य की सांस्कृतिक विरासत की झलक भी प्रस्तुत करते हैं।
इसके अलावा तुर्की का प्रसिद्ध सिरेमिक वर्क भी पर्यटकों को खूब भा रहा है। मिट्टी के बर्तन और सजावटी सामान अपनी सूक्ष्म लिखावट, चटख रंगों और इजनिक शैली की चित्रकारी के लिए जाने जाते हैं। प्लेट्स, कटोरे और फूलदान खासतौर पर घर की सजावट के शौकीनों की पहली पसंद बने हुए हैं।
इस वर्ष सूरजकुंड मेले की थीम ‘लोकल टू ग्लोबल – आत्मनिर्भर भारत की पहचान’ रखी गई है। तुर्की सहित विभिन्न देशों की भागीदारी से यह मेला वैश्विक मंच के रूप में और अधिक समृद्ध हो गया है। हरियाणा पर्यटन विभाग और सूरजकुंड मेला प्राधिकरण के सहयोग से आयोजित यह मेला न केवल भारतीय शिल्पकारों को अवसर प्रदान कर रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम भी बन रहा है।

