Faridabad/Alive News: फरीदाबाद जिले में उद्योगों से निकलने वाले दूषित पानी के शोधन के लिए तीन नए सीईटीपी (सांझा अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र) स्थापित किए जाएंगे। इन संयंत्रों में उपचारित पानी को दोबारा उद्योगों को ही उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे जहां प्रदूषण पर अंकुश लगेगा, वहीं उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले पेयजल की भी बड़ी बचत होगी। सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 926.96 करोड़ रुपये का बजट तय कर दिया है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है।
संयुक्त रूप से वहन किया जाएगा खर्च
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में परियोजना को अंतिम रूप दिया गया। निर्णय लिया गया कि पूंजीगत व्यय का 50 प्रतिशत भाग नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग वहन करेगा, जबकि शेष 50 प्रतिशत राशि हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) द्वारा 25-25 प्रतिशत के अनुपात में दी जाएगी।
संचालन व्यय प्रारंभ में एचएसआईआईडीसी उठाएगा। इसके बाद हर वर्ष यह खर्च नगर निगम, फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण, एचएसआईआईडीसी और एचएसवीपी द्वारा समान रूप से 25-25 प्रतिशत के अनुपात में वहन किया जाएगा।
इन औद्योगिक क्षेत्रों को मिलेगा लाभ
मिर्जापुर में 25 एमएलडी क्षमता का संयंत्र सेक्टर-4, 5, 6, 71 और 74 के उद्योगों के अपशिष्ट जल का उपचार करेगा।प्रतापगढ़ में 50 एमएलडी क्षमता का संयंत्र सेक्टर-24, 25, 52ए, 56 से 59, 147, 148, 150 से 153 और 155 में संचालित औद्योगिक इकाइयों को कवर करेगा। बादशाहपुर में 15 एमएलडी क्षमता का संयंत्र सेक्टर-27 ए से डी, 31, 32, 35, 36, 38 और 45 के उद्योगों के लिए स्थापित किया जाएगा।
आईएमटी में पहले से संचालित है संयंत्र
आईएमटी क्षेत्र में एचएसआईआईडीसी द्वारा 10.5 एमएलडी क्षमता का सीईटीपी पहले से संचालित है, जिसकी क्षमता बढ़ाकर 21 एमएलडी करने की योजना बनाई गई है। हालांकि, कई उद्योगों द्वारा लगाए गए निजी सीईटीपी अपेक्षित रूप से प्रभावी साबित नहीं हो पा रहे हैं।
जिले में बढ़ता औद्योगिक दबाव
जिले में करीब 25 हजार से अधिक उद्योग संचालित हैं। इनमें डाइंग यूनिट, केमिकल फैक्ट्रियां, एल्युमीनियम उद्योग और सेक्टर-58 का इलेक्ट्रोप्लेटिंग जोन प्रमुख हैं। इनसे प्रतिदिन लगभग 60 एमएलडी से अधिक दूषित पानी निकलता है, जो सीवर लाइनों के माध्यम से एसटीपी तक पहुंचता है।
यमुना नदी में प्रदूषण पर सख्ती
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा यमुना और नहरों में दूषित पानी छोड़े जाने पर सख्त रुख अपनाया गया है। प्रशासन को कई बार निर्देश दिए गए हैं कि केमिकल युक्त पानी सीधे सीवर लाइनों में न डाला जाए।
इसके बावजूद जिले में पर्याप्त शोधन संयंत्रों की कमी के कारण प्रतिदिन करोड़ों लीटर दूषित पानी नालों के माध्यम से यमुना में गिर रहा है। कई उद्योगों द्वारा चोरी-छिपे गंदा पानी नालों में छोड़ने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
नई सीईटीपी परियोजना के लागू होने से उम्मीद है कि औद्योगिक प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम साबित होगा।

