March 7, 2026

होली पर घर वापसी की जद्दोजहद: ट्रेनों में लंबी वेटिंग, यात्रियों को बसों और महंगे टिकट का सहारा

Faridabad/Alive News: होली पर्व नजदीक आते ही औद्योगिक शहर फरीदाबाद से उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, झारखंड समेत अन्य राज्यों में घर लौटने वाले प्रवासी श्रमिकों और कर्मचारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक्सप्रेस ट्रेनों में 150 से 200 तक की वेटिंग लिस्ट पहुंचने से यात्रियों को टिकट नहीं मिल पा रहे हैं, जिसके चलते लोग बसों और अन्य विकल्पों का सहारा लेने को मजबूर हैं।

शहर में उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा और मध्य प्रदेश से बड़ी संख्या में लोग काम के सिलसिले में रहते हैं। त्योहार के दौरान सीमित छुट्टियों के कारण लोग समय पर घर पहुंचना चाहते हैं। इसी वजह से फरीदाबाद और बल्लभगढ़ रेलवे स्टेशनों के आरक्षण काउंटरों पर तत्काल टिकट के लिए भीड़ उमड़ रही है, लेकिन लंबी वेटिंग के चलते अधिकांश यात्रियों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है।

इन ट्रेनों में सबसे ज्यादा भीड़

नई दिल्ली से दरभंगा जाने वाली बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में सबसे अधिक वेटिंग दर्ज की गई है। स्लीपर क्लास में वेटिंग 200 तक पहुंच चुकी है, जबकि थर्ड एसी में लगभग 197 और फर्स्ट एसी में 50 से अधिक वेटिंग चल रही है।

नई दिल्ली से ललितग्राम (सुपौल) जाने वाली वैशाली एक्सप्रेस का कोटा भी कई दिनों के लिए फुल हो चुका है। इसके अलावा गोरखपुर हमसफर एक्सप्रेस,सीतामढ़ी अमृत भारत एक्सप्रेस,शताब्दी एक्सप्रेस और अन्य ट्रेनों में भी सीटें उपलब्ध नहीं हैं। जिन यात्रियों ने दो महीने पहले टिकट बुक कराया था उन्हें राहत है, जबकि बाकी लोगों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

अवैध टिकट बिक्री बढ़ी, बस किराया भी आसमान पर

ट्रेन टिकट न मिलने से लोग अवैध टिकट विक्रेताओं का शिकार हो रहे हैं। दलाल उत्तर प्रदेश और बिहार की ट्रेनों के टिकट दोगुने दामों पर बेच रहे हैं। दूसरी ओर निजी बस संचालकों ने भी किराया बढ़ा दिया है। बदरपुर और नई दिल्ली से पटना जाने वाली नॉन-एसी बसों में सीट का किराया 2200 से 2500 रुपये और स्लीपर सीट का किराया 5000 रुपये से अधिक वसूला जा रहा है।

सेक्टर-24 निवासी ओमप्रकाश, जो बिहार के सीवान जिले के रहने वाले हैं, ने बताया कि परिवार के साथ होली मनाने के लिए उन्हें बाजार से दोगुने दाम पर स्लीपर क्लास का टिकट खरीदना पड़ा।

यात्रियों का कहना है कि अवैध टिकट बिक्री पर प्रभावी कार्रवाई न होने से आम लोगों को आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है, जबकि त्योहार के समय घर पहुंचना उनकी मजबूरी बन गया है।