Delhi/Alive News: इस साल रक्षाबंधन का पावन त्योहार 9 अगस्त को मनाया जाएगा। धार्मिक दृष्टिकोण से राखी का महत्व तभी पूर्ण होता है जब बहन अपने हाथों से भाई की कलाई पर राखी बांधे और उसे तिलक कर आशीर्वाद दे। इसलिए पारंपरिक रूप से यह माना जाता है कि रक्षाबंधन पर भाई को बहन के घर जाने से बचना चाहिए।
हिंदू धर्म में रक्षाबंधन को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं जुड़ी हुई हैं, जैसे सही मुहूर्त में राखी बांधना, भद्राकाल में राखी न बांधने की मनाही, और यह परंपरा कि बहन खुद भाई के घर जाकर राखी बांधे।
हालांकि, समय और परिस्थिति के अनुसार कई बार बहनें अपने मायके नहीं आ पातीं, ऐसे में कुछ परिवारों में भाई खुद बहन के घर जाकर राखी बंधवाते हैं। लेकिन शास्त्रों के अनुसार इसे उचित नहीं माना जाता। धार्मिक दृष्टिकोण से राखी का महत्व तभी पूर्ण होता है जब बहन अपने हाथों से भाई की कलाई पर राखी बांधे और उसे तिलक कर आशीर्वाद दे। इसलिए पारंपरिक रूप से यह माना जाता है कि रक्षाबंधन पर भाई को बहन के घर जाने से बचना चाहिए।
रक्षाबंधन से जुड़ी पौराणिक कथा
रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के वचन का प्रतीक है। यह केवल एक पारिवारिक उत्सव नहीं, बल्कि इसकी जड़ें प्राचीन पौराणिक कथाओं में भी गहराई से जुड़ी हुई हैं। ऐसी ही एक महत्वपूर्ण कथा दानवों के पराक्रमी राजा बली और भगवान विष्णु से संबंधित है, जो रक्षाबंधन के आध्यात्मिक महत्व को उजागर करती है।
दानवराज बली ने मांगा अमरत्व का वरदान
पुराणों के अनुसार, दानवों के राजा बली एक महान भक्त और तपस्वी थे। उन्होंने कठोर तप करके भगवान विष्णु को प्रसन्न कर लिया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने बली को अमरत्व और तीनों लोकों पर अधिकार का वरदान दे दिया। इस शक्ति से दानवों की स्थिति मजबूत हो गई और देवताओं को चिंता सताने लगी कि राजा बली इतनी शक्ति का दुरुपयोग कर सकता है।
देवताओं की चिंता और भगवान विष्णु का वामन अवतार
देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता की प्रार्थना की। तब भगवान विष्णु ने धरती पर वामन रूप में अवतार लिया। वे एक छोटे ब्राह्मण बालक के रूप में राजा बली के यज्ञ में पहुंचे और उससे तीन पग भूमि दान में मांगी। बली, जो अपने दान के लिए प्रसिद्ध था, बिना संकोच यह भिक्षा देने के लिए तैयार हो गया।
तीन पग में नाप लिए तीनों लोक
जैसे ही बली ने वामन की मांग को स्वीकार किया, भगवान विष्णु ने अपना विराट रूप धारण कर लिया। उन्होंने पहले पग में स्वर्ग लोक, दूसरे पग में पृथ्वी लोक को नाप लिया। तीसरे पग के लिए कोई स्थान न बचने पर, राजा बली ने समझ लिया कि यह कोई साधारण ब्राह्मण नहीं, बल्कि स्वयं भगवान विष्णु हैं। उसने श्रद्धा भाव से अपना सिर उनके सामने झुका दिया, ताकि भगवान तीसरा पग वहाँ रख सकें।
राजा बली को मिला पाताल लोक का राज्य
राजा बली की भक्ति, विनम्रता और समर्पण देखकर भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने राजा बली को पाताल लोक का स्वामी बना दिया और वचन दिया कि वे स्वयं पाताल लोक में रहकर उसकी रक्षा करेंगे। भगवान विष्णु का यह वचन ही रक्षाबंधन के मूल भाव को दर्शाता है।
रक्षा के इस वचन से जुड़ा है रक्षाबंधन
यह कथा बताती है कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक और धार्मिक वचन का भी प्रतीक है। जैसे भगवान विष्णु ने बली को रक्षा का वचन दिया, वैसे ही रक्षाबंधन के दिन भाई अपनी बहन को जीवनभर उसकी रक्षा करने का संकल्प देता है। यह त्योहार प्रेम, समर्पण और विश्वास की अद्भुत मिसाल है।

