Chandigarh/Alive News: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने RTE एक्ट के तहत प्राइवेट स्कूलों में गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25% सीटें आरक्षित रखने को कानूनी बताया है। कोर्ट ने कहा कि सभी निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को पहली कक्षा या एंट्री लेवल पर इन बच्चों को दाखिला देना अनिवार्य है।
हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार की ऑनलाइन आवेदन, स्कूल मैपिंग और लकी ड्रॉ के जरिए दाखिला देने की प्रक्रिया को भी सही ठहराया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन ड्रॉ में चयनित बच्चों को स्कूल दाखिला देने से इनकार नहीं कर सकते।
हरियाणा अभिभावक एकता मंच ने फैसले का स्वागत किया है। मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा और जिला महासचिव एडवोकेट बीएस विरदी ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मांग की है कि RTE के पात्र बच्चों को दाखिला नहीं देने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और जरूरत पड़ने पर उनकी मान्यता रद्द की जाए।
मंच के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट ओपी शर्मा और जिला अध्यक्ष एडवोकेट शिवकुमार जोशी ने आरोप लगाया कि हरियाणा में RTE के तहत गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलाने में सरकार पूरी तरह सफल नहीं रही है।
मंच के अनुसार, फरीदाबाद में इस वर्ष RTE के तहत 1,519 बच्चों का चयन हुआ था और उन्हें स्कूल आवंटित किए गए। इनमें से हरियाणा बोर्ड के निजी स्कूलों ने 767 बच्चों को दाखिला दिया, जबकि 752 बच्चों को CBSE स्कूलों ने दाखिला देने से मना कर दिया।
मंच का कहना है कि जिला शिक्षा अधिकारी फरीदाबाद ने पिछले वर्ष 28 और इस वर्ष 44 CBSE स्कूलों द्वारा पात्र बच्चों को दाखिला नहीं देने की शिकायत शिक्षा निदेशक को भेजी थी, लेकिन अभी तक उचित कार्रवाई नहीं हुई है।
मंच ने बताया कि उसके कानूनी प्रयासों से अब तक 12 पात्र बच्चों को RTE के तहत दाखिला दिलाया जा चुका है और बाकी बच्चों को भी दाखिला दिलाने के प्रयास जारी हैं।

