Faridabad/Alive News: 39 वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले के अंतिम दिन एक दुकानदार ने मेला प्राधिकरण के अधिकारियों की स्टाॅल आबंटन नीति में भ्रष्टाचार का खुलासा किया। नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर दुकानदार ने अलाइव न्यूज संवाददाता को बताया कि स्टॉल आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और इसमें पक्षपात तथा अनियमितताएं हो रही हैं।
दुकानदार के अनुसार, कई वास्तविक शिल्पकारों को समय पर स्टॉल नहीं मिलते, जबकि सिफारिश या पहचान वाले लोगों को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग पहले से टोकन या आवंटन सुनिश्चित कर लेते हैं और बाद में वही स्टॉल अन्य व्यापारियों को अधिक रकम लेकर दे दिये जाते हैं।
उन्होंने कहा कि इस तरह सूरजकुंड मेले में स्टाॅल की “री-सेल” प्रक्रिया के कारण भ्रष्टाचार बढ़ा और कुछ लोगों को स्टॉल पाने के लिए 1.5 से 2 लाख रुपये तक अतिरिक्त भुगतान करना पड़ा। तथा इसका सीधा असर मेले में आने वाले पर्यटकों की जेब पर पड़ा है, क्योंकि जिन व्यापारियों ने बढ़ी हुई कीमत पर स्टाॅल ली थी, उन्होंने अपने पैसो की भरपाई के लिए सामान को महंगी कीमत पर बेचा हैं।
दुकानदार का यह भी कहना है कि कई स्टॉल ऐसे लोगों को आबंटन किये गये थे जिनका संबंध शिल्पकारी से दूर दूर तक नहीं था। नियमों के अनुसार जिस शिल्प के नाम पर स्टॉल आवंटित होता है, उसी से जुड़े उत्पाद बेचे जाने चाहिए थे, लेकिन मौके पर इसकी निगरानी पर्याप्त रूप से नहीं हुई।
उन्होंने आरोप लगाया कि मेले में अलग-अलग दुकानों की निगरानी के लिए नियुक्त समन्वयक (कोऑर्डिनेटर) और सुपरवाइजर स्तर पर शिकायतें दबा दी जाती हैं, जिससे मामले उच्च अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाते। उन्होंने कहा, “ईमानदारी से काम करने वाले शिल्पकार परेशान होते हैं, जबकि दलाली करने वाले फायदा उठा लेते हैं,” ।
दुकानदार ने मांग की है कि स्टॉल आवंटन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाई जाए, साथ ही मौके पर नियमित जांच हो ताकि वास्तविक कारीगरों को ही लाभ मिल सके। मेला प्राधिकरण की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी प्राप्त नहीं हो सकी है।
यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मुद्दा मेले की पारदर्शिता और शिल्पकारों के हितों से जुड़ा एक गंभीर प्रशासनिक प्रश्न बन सकता है।

