Faridabad/Alive News: विजयदशमी पर्व को लेकर शहर में जगह -जगह रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतलों की तैयारी जोर-शोर से शुरू हो गई है। कारीगर बांस, कपड़ा और रंग-बिरंगी कागज की सजावट से रावण व अन्य पुतलों का निर्माण कर रहे हैं।
कारीगर करीना ने जानकारी देते हुए बताया कि वह पिछले 3 साल से रावण,मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले बनाने का काम कर रही है। इस पुतलों को निर्माण वह दशहरा के तीन महीने पहले से बनाना शुरू कर देनी है। प्रत्येक पुतले का रेट उसके साइज के अनुसार होता है। अब तक इन पुतलों को बनाने में करीब 30 हजार रुपये की लागत लगाई जा चुकी है। बढ़ती महंगाई और जगह जगह रावण बनाने वालों कारीगरों की दुकान के कारण इस बार उनकी बोनी भी नहीं हुई है। हर साल पुतलों की बिक्री के कारण उनके आने वाले त्योहारों और रोजाना का खर्चा निकल जाता था पर इस बार तो पता नहीं कैसे उनके खर्चे पूरे होगे।
कारीगर सुरेश ने कहा कि इस बार लोग पर्यावरण के प्रति जागरूक हो रहे हैं, इसलिए हम पुतलों में प्लास्टिक का प्रयोग बिल्कुल नहीं कर रहे। बांस, लकड़ी और कागज का ही इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि प्रदूषण कम फैले।
कारीगर रामपाल ने कहा कि इस बार मांग पिछले साल से ज्यादा है। उन्हें हर साल दशहरे का इंतजार रहता है, क्योंकि इसी मौके पर उन्हें उनकी कारीगरी देखने का मौका मिलती है। इस बार उन्होंने पुतलों में नए डिजाइन और आकर्षक रंगों का इस्तेमाल किया है, ताकि बच्चे और बड़े दोनों आकर्षित हों।

