March 8, 2026

इस्कॉन मंदिर सेक्टर 37 में मनाई गई राधारानी की प्राकट्य तिथि – राधाष्टमी

Faridabad/Alive News: इस्कॉन मंदिर, सेक्टर 37, फरीदाबाद ने श्रीमती राधारानी की प्राकट्य तिथि राधाष्टमी का भव्य उत्सव मनाया गया। भगवान श्रीकृष्ण, जो सर्वोच्च पुरुषोत्तम भगवान हैं, उनकी आंतरिक शक्ति और स्त्री स्वरूप श्रीमती राधा रानी हैं। दोनों में कोई भेद नहीं, वे अभिन्न और एक ही हैं।

भगवान श्रीकृष्ण की अनेक शक्तियां हैं, जिनमें से राधा रानी उनकी अंतरंग शक्ति है जो सदैव भगवान की प्रेम भक्ति सेवा में लीन रहती हैं। उनका वर्ण पिघले हुए स्वर्ण के समान है। श्रीकृष्ण सर्वाधिक आकर्षक हैं वे सबको अपनी ओर आकृष्ट करते हैं, इसलिए उन्हें मदन मोहन कहा जाता है। किंतु श्रीमती राधा रानी स्वयं श्रीकृष्ण को भी आकर्षित करती हैं इसलिए उन्हें मदन मोहन मोहिनी कहा जाता है। श्रीकृष्ण उनकी आराधना करते हैं, इसलिए उनका नाम राधा पड़ा। वहीं वे स्वयं श्रीकृष्ण की आराधना करती हैं, इसलिए उन्हें राधिका भी कहा जाता है।

राधा रानी का प्राकट्य लगभग 5000 वर्ष पूर्व वृंदावन के समीप रावल गांव में हुआ था। वृंदावन की सभी गोपियां उन्हीं की विभिन्न विस्तार स्वरूप हैं, जिन्हें उन्होंने केवल श्रीकृष्ण की सेवा के लिए प्रकट किया। वे अत्यंत शक्तिशाली और असीम दयामयी हैं। श्रीकृष्ण की सेवा करने की पूर्ण व्यवस्था उन्हीं के हाथों में है। वे भक्तों को सेवा करने की शक्ति, मार्गदर्शन और आशीर्वाद देती हैं।

वैष्णव परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण तक सीधी पहुंच संभव नहीं होती। परंतु जिसे राधारानी अनुशंसा करती हैं, उसे श्रीकृष्ण कभी अस्वीकार नहीं करते। इसलिए भक्तगण सदा राधारानी से प्रार्थना करते हैं कि वे उन्हें श्रीकृष्ण की सेवा में लगा दें। इसी उद्देश्य से भक्तगण हरे कृष्ण महा-मंत्र का जप करते हैं— “हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।” यहां हरे शब्द स्वयं राधा रानी का ही सूचक है। यह मंत्र राधा और कृष्ण दोनों की सेवा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। राधा रानी रसोई कला में भी निष्णात है। वे भगवान श्रीकृष्ण के लिए हर दिन नया-नया व्यंजन बनाती हैं और कभी भी एक ही व्यंजन पुनः नहीं बनातीं।

 कल रविवार को इस्कॉन में राधाष्टमी का उत्सव प्रातः साढ़े चार बजे बजे मंगल आरती से प्रारंभ हुआ था। इसके पश्चात हरिनाम जप, गुरु आरती, कथा और कीर्तन हुआ। राधा-कृष्ण का भव्य अभिषेक भी किया गया, जिसमें शुद्ध फलों के रस, दूध, दही और शहद का प्रयोग हुआ।

मंदिर अध्यक्ष गोपीश्वर दास ने कहा—
“वह राधाष्टमी बड़े उत्साह से मनाते हैं। वह राधारानी से प्रार्थना करते हैं कि वे अपनी कृपा उन पर बरसाए जिससे वह श्रीकृष्ण की और बेहतर सेवा कर सकें। केवल उनकी अनुमति से ही वह कृष्ण और उनके भक्तों की सेवा कर पाते हैं। कृष्ण और राधा एक हैं और वह  उनकी संयुक्त सेवा करते हैं। इसलिए हर मंदिर में कृष्ण के साथ राधा भी विराजमान रहती हैं।