Faridabad/Alive News: पुस्तक ज्ञान के अलावा बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान अति आवश्यक है। व्यवहारिक ज्ञान से ही बच्चों में ऐतिहासिक भौगोलिक, सामाजिक ज्ञान की वृद्धि को बढ़ाया जा सकता है। शिक्षकों को चाहिए कि वे पुस्तक के साथ इसको ज्यादा प्राथमिकता दें। यह बात वयोवृद्ध शिक्षाविद धर्मगोपाल सक्सेना ने ग्रेटर फरीदाबाद स्थित श्रद्धा मंदिर स्कूल के स्व. यादराम आर्य हॉल में जिले भर के शिक्षकों को गुरु विरजानंद सम्मान समारोह 2025 में सम्मानित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि देश के बदलते परिवेश और तकनीक के चलते अब शिक्षकों को भी अपने शिक्षण क्षेत्र में बदलाव करने की आवश्यकता है तभी देश का भविष्य युवाओं के हाथों सुरक्षित रहेगा। पूर्व विधायक एवं आर्य नेता राजेंद्र सिंह बींसला ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ स्कूलों में देशभक्ति और समर्पण की भावना को भी शामिल करना होगा। ताकि देश का युवा शिक्षा के बाद देश की आन-बान और शान के लिए सदैव तत्पर रहे। निरंतर हो रहे नैतिक पतन को रोकने के लिए अब शिक्षकों को दृढ़ संकल्पित होने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के संयोजक एवं श्रद्धा शिक्षण संस्थान के अध्यक्ष डा. गजराज सिंह आर्य ने कहा कि गुरु विरजानंद सम्मान समारोह का आयोजन शिक्षकों को सम्मान देने के साथ-साथ जिले से आए अनुभवी शिक्षकों, प्रोफेसरों के विचारों से भी अवगत करवाना था, जिन्होंने देश के भविष्य को सुरक्षित रखने में शिक्षा के क्षेत्र में अपने जीवन की आहुति दे दी। आज शिक्षकों का सम्मान कर संस्थान प्रबंधन को अपार खुशी की अनुभूति हो रही है। ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों का मनोबल बढ़ाने का कार्य करते हैं।
इस अवसर पर दर्शन कुमार चुघ, ऊषा चितकारा, डा. कुलदीप कुमार, डा. एस.पी. सिंह, डा. रोहताश कुमार, प्रवीण शर्मा, डा. नीलम, विमला ग्रोवर, आर्य प्रतिनिधि हरियाणा के प्रधान देशबंधु आर्य, महादेव देसाई विद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य एवं आर्य केंद्रीय सभा नगर निगम के महामंत्री योगेंद्र फोर ने भी अपने विचार शिक्षकों के समक्ष रखे। इससे पूर्व संस्थान की ओर से सभी शिक्षकों को अंगवस्त्र और गुरू विरजानंद सम्मान की शील्ड भेंट की।
इस अवसर पर स्कूल प्रबंधन कमेटी के मूलचंद आर्य, राजकुमार आर्य, हर्षित आर्य ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में स्कूल के बच्चों द्वारा वेदभक्ति, देशभक्ति और राष्ट्रभक्ति के गीतों से सभागार को मनोरम बनाया। कार्यक्रम में डी.सी. सैनी, सुभाष ग्रोवर, अशोक आर्य अनुज प्रताप सिंह, आशा आर्या सहित विभिन्न स्कूलों और कालेजों के अध्यापक और प्राध्यापक उपस्थित थे।

