प्रभजोत कौर
उत्तर भारत के कई राज्यों में बादल फटना, भूस्खलन, सामान्य से ज्यादा बारिश और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं आना कुछ ठीक नहीं है। पंजाब, हिमाचल, जम्मू, हरियाणा और दिल्ली के कई हिस्से इसकी चपेट में आ गए और स्थिति भयावह हो गई। आप जानते है कि यह प्राकृतिक आपदा क्यों हो रही है। ज्यादातर लोगों से यह सवाल पूछा जाए तो अधिकतर लोगों का जवाब होगा कि भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हुई है। जोकि कुछ हद तक ठीक जवाब है। लेकिन इसकी सही और सटीक जवाब होगा कि जलवायु परिवर्तन की वजह से 2 मौसम आपस में टकराए यानी की एक मौसम अपने समय से पहले आ गया है और दूसरा पहले से चल रहा है।
अब मौसम को विस्तार से जानिये
मानसून हवाएं और पश्चिमी विक्षोभ ये दोनों अलग-अलग मौसम की स्थितियां है। जो भारत के मौसम को प्रभावित करती है। इस साल बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होने में दोनों मौसम का आपस में टकराना है एक बड़ा कारण है। मानसून असल में हवाओं का चक्र है जो गर्मी और सर्दी में अपनी दिशा बदलता है। भारत की जमीन बहुत ज्यादा गर्म हो जाती है, जबकि समुद्र ठंडा रहता है। इस वजह से समुद्र से आने वाली नमी वाली हवाएं जमीन की तरफ तेजी से बढ़ती हैं। जब यह हवाएं पहाड़ो (हिमालय) से टकराती हैं, ऊपर उठकर ठंडी होती है और भारी बारिश करती है। यह आमतौर पर जून और सितंबर के बीच होती है और भारत की ज्यादातर बारिश इसी से होती है।
वही, दूसरी ओर पश्चिमी विक्षोभ भूमध्य सागर में बनने वाले तूफान होते है। ये तूफान हवा के साथ पश्चिम से पूर्व की ओर चलते है हुए ईरान पाकिस्तान से होते हुए भारत में आते है। बारिश और बर्फबारी से ये अपने साथ नमी लाते है, जिससे उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में सर्दी में बारिश होती है और पहाड़ो पर बर्फबारी होती है। यह ज्यादातर दिसंबर से फरवरी के बीच आता है। यह बारिश रबी की फसलों जैसे गेहूं के लिए अच्छी होती है।
दोनों के टकराने से बाढ़ क्यों आती है
यह एक असामान्य घटना है। आमतौर पर पश्चिमी विक्षोभ और मानसून अलग-अलग समय पर आते है। लेकिन जब कभी कभार ये दोनों एक ही समय पर मिल जाते है, तो भयानक बाढ़ आ जाती है। मॉनसून पहले से ही बहुत ज्यादा नमी ला रहा होता है। तभी पश्चिमी विक्षोभ आ जाता है, जो मानसून की हवाओं में और नमी भर देता है। जिसके परिणाम स्वरूप दोनों के मिलने से आसमान में बहुत ज्यादा नमी इकट्ठा हो जाती है और रिकॉर्ड तोड़ बारिश होती है।
मनुष्य भौतिकवादी का शिकार है। वह अपने स्वार्थ के लिए पर्यावरण के साथ लगातार छेड़छाड़ कर रहा है जिसके परिणाम हम आज मनुष्य ही भुगत रहे है। प्रदूषण फैलाना, जंगल काटना, मिट्टी दोहन जैसे कार्य लगातार कर रहा है। अब शहर बसाने के लिए पेड़ों की कटाई भी इनमें एक मुख्य कारण हैं।मनुष्य का काम नदियों के रास्तों में डैम बनाकर रुकावट पैदा करना, घर बनाना आदि कारण भी हैं। इन सबका असर जलवायु परिवर्तन पर भी पड रहा है। इस तरह इंसान अपनी हरकतों से तूफानों को जन्म दे रहा है। ये सब मनुष्य को रोकना होगा। वरना, परिणाम ओर ज्यादा भयावह होंगें।
(लेखक बीजेएमसी की फाइनल ईयर की छात्रा है)

