Delhi/Alive News: भारत के दक्षिण में हिंद महासागर में स्थित मालदीव साउथ एशिया का सबसे छोटा देश है। 1200 द्वीपों में फैले इस देश का क्षेत्रफल 298 वर्ग किलोमीटर है, जो दिल्ली से भी पांच गुना कम है। पीएम मोदी आज दो दिन के दौरे पर मालदीव पहुंचे हैं।
इस देश का इतिहास लगभग 2500 साल पुराना है। 5 लाख की आबादी वाले मालदीव में 98% लोग मुस्लिम हैं, लेकिन लगभग 900 साल पहले यह बौद्ध और उससे पहले हिंदू धर्म का प्रमुख केंद्र था। 12 वी सदी में इस देश के राजा ने इस्लाम धर्म अपना लिया था, जिसके बाद 150 सालों में यह पूरी तरह मुस्लिम देश बन गया। वैज्ञानिक रिपोर्ट्स के मुताबिक जलवायु परिवर्तन की वजह से 25 साल में मालदीव का 80% हिस्सा डूब सकता है।
75 साल में 100% देश डूब सकता है
दुनिया के बाकी हिस्सों की तरफ मालदीव भी जलवायु परिवर्तन के संकट से अछूता नहीं है। समुद्र का तेजी से बढ़ता जल स्तर मालदीव के ज्यादातर हिस्सों को डुबा सकता है।
वैज्ञानिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर ग्लोबल वार्मिंग ऐसे ही चलती रही, तो 2050 तक मालदीव का 80% हिस्सा रहने लायक नहीं बचेगा, और 2100 तक ये पूरा देश समुद्र में समा सकता है।
वैज्ञानिकों की एक बड़ी संस्था Iआईपीसीसी का कहना है कि 2100 तक समुद्र का स्तर 59 सेंटीमीटर से 1 मीटर तक बढ़ सकता है। मालदीव की औसत ऊंचाई 1.5 मीटर और सबसे ऊंचा हिस्सा 2.4 मीटर है।
वहीं, विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि समुद्र का स्तर 10 से 100 सेंटीमीटर तक बढ़ सकता है, जिससे मालदीव पूरी तरह डूब सकता है। 2021 तक, मालदीव के 90% द्वीपों में जमीन का कटाव बढ़ गया है और 97% द्वीपों में साफ पीने का पानी खत्म हो गया।

