Faridabad/Alive News: नवरात्रि के नौ दिनों नौ माता की पूजा अर्चना की जाती है। 26 सितंबर को नवरात्रि का पांचवां दिन है। इस दिन मां दुर्गा के पांचवे नवदुर्गा स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा अर्चना पूरे भक्तिभाव और श्रद्धा के साथ की जाती है। मां स्कंदमाता को विशेष रूप से सुख, शांति और समृद्धि की देवी माना जाता है।
कैसा है मां स्कंदमाता का स्वरूप
मां स्कंदमाता अपने पुत्र कार्तिकेय को गोद में लेकर सिंह पर सवार रहती है। इनकी चार भुजाएं होती है उनके दो हाथों में कमल और एक हाथ में स्कन्द को धारण करती हैं, जबकि चौथे हाथ से वह भक्तों को आशीर्वाद देती है।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक मां स्कंदमाता की पूजा करने से भक्तों के सभी दुख दूर होते है और उन्हें विशेष आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। भक्तों की सच्ची प्रार्थना से संतान सुख और समृद्धि प्राप्त होती है।
क्या है मां स्कंदमाता का शुभ रंग
इस दिन पीला, नारंगी या सफेद रंग विशेष शुभ माना जाता है।
क्या है मां स्कंदमाता की पूज विधि
सबसे पहले सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। तब मां की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराये। इसके बाद मां को कुमकुम, रोली, पुष्प, फल, मिठाई, पान का पत्ता, लौंग, इलाइची व श्रृंगार का सामान अर्पित करे। मां के सामने धूप, दीप जलाये और अंत में आरती करे।
क्या है मां स्कंदमाता का प्रिय भोग
नवरात्रि के पांचवे दिन मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाया जाता है। इस दिन मां को केले की खीर, केले से बनी मिठाई या केले का हलवा भी भोग के रूप में अर्पित करने से मां के प्रसन्न होने की मान्यता है। इसके अलावा मां को फल, मिठाई, मिश्री व खीर का भी भोग लगा सकते है।
क्या है मां स्कंदमाता का प्रिय पुष्प
मां स्कंदमाता को कमल का पुष्प बहुत प्रिय है। इसके अलावा मां को गुलाब और गुड़हल के पुष्प भी अर्पित किया जाता है।

