March 7, 2026

गाजा पट्टी के भविष्य को लेकर इस्लामिक देशों में ही जंग, सऊदी अरब और यूएई से उलझा कतर

Delhi/Alive News: इजरायली हमलों में गाजा के भविष्य को लेकर मध्य पूर्व में इस्लामिक देशों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। ये विवाद हमास के हथियार को लेकर है. खाड़ी क्षेत्र के तीन प्रमुख देश, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात गाजा के भविष्य को लेकर समग्र रूप से चिन्हित हो गए हैं। असल में, इजराइल चाहता है कि सऊदी अरब और धार्मिक गाजा के पुनर्निर्माण का काम हो, लेकिन इन दोनों देशों ने बहुत बड़ी शर्त रखी है। इन दोनों देशों की शर्त ये है कि वो गाजा में एक बार फिर से निर्माण का काम शुरू करेंगे, जब हम अपनी सारी समृद्धि का सरेंडर कर देंगे।

सऊदी अरब और यूएई ने कहा है कि जब तक हम अपने हथियार नहीं खोलेंगे और उनकी जगह कोई दूसरा वैध प्रशासन नहीं आएगा, तब तक वे एक डॉलर भी निवेश नहीं करेंगे। दूसरी तरफ, कतर इस पूरे प्वाइंट में खुद को मध्यस्थ और गाजा के लोगों को पालने वाले देश के तौर पर प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। उनका कहना है कि गाजा में स्थायी राहत और पुन:निर्माण कार्य शुरू होना चाहिए। इसके पीछे कतर की कोशिश हमास से अपने पुराने उद्यमों और अमेरिका के हीच संतुलन साधने की है।

गाजा में पुननिर्माण को लेकर खाड़ी देश कलह में
वाईनेटवर्क न्यूज के मुताबिक, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात का मानना ​​है कि गाजा का पुनर्निर्माण सिर्फ एक मानवीय परियोजना नहीं बल्कि क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन को फिर से गढ़ने का बहुत बड़ा मौका है। दोनों उद्यमों की बंधक सुरक्षा से लेकर अधिकांश वित्तीय और राजनीतिक हैं। वे ऐसे किसी क्षेत्र में अरबों डॉलर नहीं खोना चाहते हैं जहां किसी भी वक्त से फिर कोई नया संघर्ष शुरू होने का खतरा हर वक्त बना रहता है। इसके अलावा खाड़ी देश में भी आम जनता के बीच हमास को लेकर भारी आक्रोश और गुस्सा है। विशेष रूप से सऊदी अरब और होटल में। साइंटिस्ट और साझीदार नागरिकों में हमास को एक “चरमपंथी और आश्रम पैदा करने वाली ताकत” के रूप में देखा जा रहा है। इसलिए रियाद और अबू धाबी फ़ॉफ़कर स्टेप रख रहे हैं।

सऊदी अरब ने साफ शब्दों में कहा है कि वह फिलीस्तीनी अथॉरिटी या किसी अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्था को अधिकार दिए बिना, गाजा में पुन: निर्माण के लिए फंड जारी नहीं करना चाहता। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात, जो पहले से ही मानव क्षेत्र में सक्रिय हो रहा है, कथित तौर पर गाजा में एक बहुराष्ट्रीय सुरक्षा बल में शामिल होने की तैयारी कर रहा है, लेकिन जब तक हम अपने हथियार डाल दे। इसके अलावा फिलिस्तीन ने फिलिस्तीनी अधिकारियों के अंदर भी सुधार करने की शर्त रखी है। यूएई चाहता है कि फिलीस्तीन रिटेलर का भी यहां प्रभाव हो।

कतर के फैसले को लेकर समानता क्यों है?
असल, कतर के पिछले कई वर्षों से हमास से संबंध रहे हैं। कतर में कई हमास नेताओं के घर भी हैं और गाजा को लेकर युद्धविराम बैठकें भी दोहा में ही हो रही हैं। कतर अभी भी हमास के बीच अपने प्रभाव को उजागर नहीं करना चाहता। अन्य कतरों का तर्क यह है कि यदि गाजा के वास्तुशिल्प ढांचे में सुधार नहीं किया गया, तो क्षेत्रीय उद्योग और मानवीय संकट और गहरे हो जाएंगे। इस रुख ने उन्हें अमेरिकी सहयोगियों का विश्वसनीय मध्यस्थ बना दिया है, खासकर जब डोनाल्ड की मान्यताएं सीजफायर और मानवीय सहायता में कतर की भूमिका में हैं। यही कारण है कि इजराइल भी, असहमति के बावजूद, दोहा की भागीदारी को पूरी तरह से खारिज नहीं कर रहा है।

लेकिन इजराइल, सऊदी अरब और म्यूजियम को सेंटर में देखना चाहता है। सऊदी अरब और आतंकियों का दावा है कि हमास को फिर से मजबूत बनाया जाएगा। इससे हमास को ऑक्सीजन मिलेगा और आगे गाजा में फिर से बदलाव आएगा। यही कारण है कि शर्म अल-शेख सम्मेलन में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधि शामिल नहीं हुए थे। यानी, गाजा को लेकर ये प्रतिष्ठा काफी बढ़ गई है। यही सवाल है कि गाजा के लोगों को राहत मिल सके इसके लिए बीच का रास्ता क्या है?