Faridabad/Alive News : नालाें की सफाई के नाम पर हर साल जमकर गाेलमाल हाेता है। यदि ऊपर से सख्त आदेश आ जाएं ताे नालाें की सफाई ताे करा दी जाती है, लेकिन गाद काे किनारे पर छाेड़ दिया जाता। महीनाें इसे उठाया नहीं जाता। धीर – धीरे करके यह गाद फिर से नाले में चली जाती है। खासकर वर्षा के दाैरान। इसे अधिकारी जानबूझकर नहीं उठवाते। यदि गाद उठाता दी गई ताे फिर अगले साल नालाें की सफाई के नाम पर गाेलमाल कैसे हाेगा।
नालाें की सफाई का काम भी तब शुरु किया जाता है, जब वर्षा हाेनी शुरु हाे जाती है। जबकि ये काम बहुत पहले शुरु करा देना चाहिए। वैसे नगर निगम हर साल नालाें की सफाई पर तीन कराेड़ से अधिक खर्च करने का दावा करता है। अधिकारियाें की इसी लापरवाही की वजह से शहरवासियाें काे जलभराव का सामना करना पड़ता है। हैरत की बात यह भी है कि जनप्रतिनिधि चुप्पी साधे बैठे रहते हैं। ऐसा भी हाे सकता है कि सभी की मिलीभगत हाे। बुधवार काे शहर की ऐसे ही कुछ नालाें की पड़ताल की ताे घाेर लापरवाही सामने आई। गाैंछी ड्रैन औघाेगिक नगरी में गौंछी ड्रेन प्रमुख नालाें में से एक है। यह ओल्ड फरीदाबाद क्षेत्र से शुरु हाेकर नालम चाैक से सेक्टर -52 प्रतापगढ़ सीवर शाेधन संयंत्र तक जाता है। इससे आगे यह हाेडल, हथीन, पलवल हाेते हुए युमना में जाकर गिरता है। एनआईटी क्षेत्र में इसकी लंबाई लगभग 10 किलाेमीटर है। समय पर सफाई न हाेने की वजह से वर्षा हाेने पर लाेगाें काे जलभराव की समस्या से जूझना पड़ता है। इसकी सफाई करा दी जाती है, लेकिन गाद काे कई दिनाें तक नहीं उठाया जाता।
एक – दाे दिन में सूख जाती है गाद नाले की सफाई करने पर उससे निकली गाद एक – दाे दिन तक छाेड़ी जाती है, ताकि वह सूख जाए और इसे उठाने में आसानी हाे। लेकिन देखने में आ रहा है महीनाें तक गाद नहीं उठाई जा रही है। इस लापरवाही ने लाेगाें की परेशानी काे और बढ़ा दिया है।
आधा बुढि़या नाला हमारे पास हैं। इससे बहुत अधिक गाद निकली हैं। इसे किनारे पर डाल दिया है। पुरी तरह से सुखने के बाद इसे उठावा दिया जाएगा।
- राकेश सिंह उपमंडल अधिकारी, सिंचाई विभाग
नालाें की सफाई का काम जारी है। गाद गीली हाेती है, सूखने के बाद उठाई जाती है। जहां गाद है, उसे उठाई जाती है। उसे उठाया दिया जाएगा।
- ओमबीर सिंह अधीक्षण अभियंता, नगर निगम
नालाें की सफाई के नाम पर लाखाें रुपये का हेरफेर कर दिया जाता है। यदि नालाें की सफाई हर साल हाे रही है ताे फिर जलभराव क्याें हाेता है। अब किनारे पड़ी गाद नही उठाई जा रही है।
- अजय सैनी, अजराैंदा
गाद न उठाने की वजह से यह फिर से नाले के अदंर चली जाती है। यह खेल चलता रहता है। इससे इनकी कमाई हाेती है। इस मामले में कार्रवाई हाेनी चाहिए। गाद उठाई जानी जरुरी है।
- देवेद्र मलिक, दयालवाग

