Faridabad/Alive News: फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक पर्व है। इस दिन श्रद्धालु सायंकाल होलिका माता की विधिवत पूजा-अर्चना कर शुभ मुहूर्त में अग्नि प्रज्वलित करते हैं। परंपरा के अनुसार होलिका दहन सदैव रात्रि में किया जाता है, दिन में नहीं। इस वर्ष होलिका दहन आज 2 मार्च सोमवार के दिन रात को किया जाएगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलिका दहन से नकारात्मक शक्तियों और बुराइयों का नाश होता है तथा सत्य की विजय होती है। इस अवसर पर जहां कुछ कार्य करना शुभ माना गया है, वहीं कुछ कार्यों से बचने की सलाह भी दी जाती है।
होलिका दहन के दिन क्या न करें
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से धन हानि और रोगों की आशंका बढ़ सकती है। होलिका दहन के दिन धन का लेन-देन या उधार लेना-देना भी अशुभ माना गया है। बुजुर्गों का अपमान करने से बचना चाहिए। उनके आशीर्वाद से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। इसके अलावा होलिका दहन की रात दूसरों के घर भोजन करने से भी परहेज करने की सलाह दी जाती है।
रात में न लाएं होलिका की राख
होलिका की राख का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। कई लोग दहन के तुरंत बाद राख घर ले आते हैं, लेकिन मान्यता है कि ऐसा नहीं करना चाहिए। राख अगले दिन सूर्योदय से पहले या सूर्योदय के समय, जब अग्नि पूर्ण रूप से शांत हो जाए, तब लाना शुभ माना जाता है। राख लाने से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए।
होलिका दहन पर क्या करें
होलिका दहन के दिन शुभ मुहूर्त में पूजा कर फल-फूल, जल, मोली, गुलाल और गुड़ अर्पित करें। कच्चे सूत को होलिका के चारों ओर तीन या सात बार परिक्रमा करते हुए लपेटें। दहन के समय भगवान विष्णु की आराधना विशेष फलदायी मानी गई है। विष्णु सहस्रनाम या नारायण कवच का पाठ किया जा सकता है। जिन लोगों को मानसिक अशांति या चंद्र दोष की समस्या हो, वे फाल्गुन पूर्णिमा की रात चंद्र देवता को मिश्री मिले दूध से अर्घ्य दें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया होलिका दहन जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।

