March 13, 2026

हरियाणा के सरकारी स्कूलों की बदहाली पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा विस्तृत जवाब

Chandigarh/Alive News: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार से स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात और सुविधाओं को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी है।

चीफ जस्टिस शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे 21 अप्रैल तक इस मामले में विस्तृत हलफनामा दाखिल करें। अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय तक जवाब दाखिल नहीं किया गया तो सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

हाईकोर्ट ने कहा कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के तहत स्कूलों में विद्यार्थियों और शिक्षकों के अनुपात के निश्चित मानक तय हैं। अदालत ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि क्या स्कूल भवन और खेल-कूद से जुड़ी सुविधाएं भी इन मानकों के अनुसार उपलब्ध हैं या नहीं।

पिछली सुनवाई में सरकार ने कहा था कि फरीदाबाद, नूंह और पलवल को छोड़कर बाकी जिलों में छात्र-शिक्षक अनुपात के मानकों का पालन किया जा रहा है। लेकिन अदालत ने पाया कि सरकार द्वारा दिए गए आंकड़े सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किए गए थे, इसलिए अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए गए।

दरअसल, 10 अक्टूबर 2025 को एक अखबार में छपी खबर “आठ जिलों के स्कूलों में बच्चों के अनुपात में शिक्षक बेहद कम, कहीं 500 बच्चों पर एक ही शिक्षक”पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सरकार को नोटिस जारी किया था। इसके बाद भी सरकार की ओर से पूरा और स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया, जिस पर अदालत ने नाराजगी जताई।

इस मामले में हरियाणा अभिभावक एकता मंच के पदाधिकारियों का कहना है कि हाईकोर्ट पहले भी कई बार सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने, जर्जर भवनों की जगह नई इमारत बनाने, बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने और शिक्षकों की कमी दूर करने के निर्देश दे चुका है। उनका आरोप है कि सरकार सरकारी स्कूलों में सुधार करने के लिए ठोस कदम नहीं उठा रही, जिससे अभिभावक महंगी फीस देकर बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने को मजबूर हैं।

मंच का कहना है कि अगर सरकार ने कोर्ट के आदेशों पर कार्रवाई नहीं की तो इस मामले में हाईकोर्ट में अवमानना याचिका भी दायर की जाएगी।